आज महिलायें हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। विज्ञान से लेकर, खेती तक महिलाएं, पुरूषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी हैं। कुछ महिलाओं ने तो देश का नाम रोशन किया और देश के लिये एक मिसाल बन गईं। वो पितृसत्तामक सोच रखने वाले लोगों के लिये वो तमाचा बनकर आई हैं। ये हमारे जैसे देशों की बात है लेकिन आज भी ऐसे देश हैं जहां महिलाओं को बुर्का पहनना ही पड़ता है। जहां महिलायें कुछ अच्छा करती हैं तो उनको रोक दिया जाता है। जब ऐसे देश में कोई महिला कुछ अलग करने की हिम्मत करती है तो वो शुरूआत होती है बदलाव की। ऐसा ही कुछ बदलाव तुर्की में हुआ है।

तुर्की में देश की सबसे बड़ी मस्जिद कैमलीका को गुरूवार के दिन लोगों की इबादत के लिए खोल दिया गया है। पहले दिन करीब 9 हजार लोगों ने इस मस्जिद में नमाज पढ़ी। इस मस्जिद में करीब 60 हजार लोग एक साथ नमाज पढ़ सकते हैं। इस मस्जिद की खास बात ये है कि इसका डिजाइन दो महिलाओं ने तैयार किया है। आर्किटेक्ट बहार मिजरक और हायरिए गुल तोटू ने कैमलीका मस्जिद का डिजाइन तैयार किया।

देश की सबसे बड़ी मस्जिद

मस्जिद का डिजाइन तैयार करने वाली आर्किटेक्ट बहार मिजरक ने बताया कि सरकार ने इसके डिजाइन के लिए प्रतियोगिता कराई थी। उसमें हिस्सा लेने के लिए मैंने गुल के साथ करीब 35 दिन तैयारी की। उसके बाद हमने मिलकर इस डिजाइन को तैयार किया। जिसे बाद में मंजूर कर लिया गया। जब हमारा डिजाइन मंजूर हुआ तो कई लोगों ने आलोचना भी की। उनका कहना था कि मस्जिद का डिजाइन महिलाएं कैसे बना सकती हैं? लेकिन राष्ट्रपति तैयप एर्दोगन ने हमारा साथ दिया।

emAA Photo/emकैमलीका मस्जिद को बनाने में 280 करोड़ की लागत आई है। ये मस्जिद राजधानी इस्तांबुल की कैमलिक पहाड़ी पर बनाई गई है। इस मस्जिद को बनाने में 6 साल का समय लगा। मस्जिद 30 हजार वर्गमीटर क्षेत्र में बनी है। इसमें 72 मीटर उंचा गुंबद भी है। जो तुर्की में रहने वाले 72 देशों के नागरिकों का प्रतीक है। तुर्की की ये दूसरी मस्जिद है जिसमें 6 मीनारें बनी हुई हैं।

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