23 अप्रैल 2019, गुजरात में हुये लोक सभा चुनाव के तीसरे चरण में सिर्फ 63.67 प्रतिशत वोटिंग हुई। वहीं जामनगर, कच्छ और तापी जिले के गांवों ने वोटिंग का बहिष्कार किया। असल में फसल के खराब होने पर मिलने वाली बीमे की रकम कम होने और पानी की खराब व्यवस्था के चलते सभी गाँव वालों में नाराजगी थी। जामनगर के भंगोरा गाँव में जहाँ लोग मूँगफली की फसल खराब होने के कारण निराश थे। वहाँ 3 पोलिंग बूथ के अंतर्गत आने वाले 3344 वोटरों ने वोटिंग का बहिष्कार किया।

रवि शंकर, जामनगर के डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर और रिटर्निंग ऑफिसर उन्होंने अपनी तरफ से पूरा प्रयास किया कि गाँव के लोग वोटिंग करें। रविशंकर ने मीडिया से बात-चीत में कहा –

“हमने गाँव वालों को मनाने के लिए अपने तालुका विकास अधिकारी और पुलिस अधीक्षक को भी भेजा। हमने उन्हें समझाना चाहा कि मुआवजा दिलवाने में हमारी कोई भूमिका नहीं है, यह उनके और इंश्योरेंस कंपनी के बीच की बात है।”

हालांकि इस पर भी गाँव वालों का रुख नरम नहीं हुआ। वहीं दूसरी ओर तापी जिले के सोनगढ़ तालुका स्थित 3 गाँव बुधवाड़ा, पुराना अमलपाड़ा और पुराना कुइलवेल, बरडोली लोकसभा के अंतर्गत आते हैं। यहाँ के लोगों ने भी चुनाव का बहिष्कार किया और इसकी वज़ह थी इलाके में पानी की कमी, स्वस्थ्य सेवाएँ, शिक्षा, सड़क और बिजली जैसी बेसिक सुविधाओं का पूरा न होना बताई गयी है। चुनाव अधिकारी के अनुसार इन तीन गांवों में 1200 वोटर हैं जिन्होंने इलेक्शन से कुछ वक़्त पहले ही वोट न देने का ऐलान कर दिया था।

यहाँ तक कि इस बहिष्कार के बाद चुनाव अधिकारी ने खुद पहुँच कर गाँव वालों को नोटा दबाने का भी सुझाव दिया। लेकिन तापी के जिलाधिकारी आरएस निनामा का कहना है

“हमने हर संभव कोशिश की, लेकिन उन्होंने मना कर दिया।”

अब आपको बताते हैं कच्छ जिले के नन्दा गाँव की बात जहाँ तकरीबन 549 वोटर हैं जिसमें से सिर्फ एक ने वोट दिया बाकी सभी ने चुनाव का बहिष्कार किया। कच्छ के पुलिस ऑफिसर ने कहा-

“सरकार उन्हें पीने का साफ पानी नहीं दे रही इसलिए वो वोट नहीं डालेंगे।”

आपको यह जानना ज़रूरी है कच्छ इस वक़्त सूखे के सबसे बुरे दौर से गुज़र रहा है। दूसरी तरफ इस बहिष्कार पर स्थानीय नेताओं और समुदाय के लीडरों का कहना है कि सूखे की वजह से कच्छ में वोटिंग पर असर पड़ा है। सूखा पड़ना भी अब राजनीतिक हो गया है लेकिन यह चुनाव बहिष्कार इस बात का एहसास कराने के लिए काफी है कि सरकार को ज़रा सही से अपनी नज़र घुमा कर देखना चाहिए अभी बहुत कुछ है जो विकास के आस-पास भी नहीं पहुंचा है।

इस ख़बर के इनपुट्स जनसत्ता से लिए गए हैं.