देश में लोकसभा चुनाव चल रहे हैं जिसमें विभिन्न राज्यों में मतदान प्रतिशत आशा के विपरीत कम ही रही है, सिवाय एक राज्य के, पश्चिम बंगाल। पश्चिम बंगाल में प्रत्येक चरण में होता अधिक मतदान अत्यन्त चर्चा में है। इसके लिए कुछ लोग ममता सरकार के प्रयत्नों व जागरूकता हेतु किए गए प्रयासों के कसीदे पढ़ रहे हैं और वहीं अन्य लोग आरोप लगा रहे हैं कि ये फर्जी मतदान है जो तृणमूल कांग्रेस को लाभ पहुँचाने के लिए किया जा रहा है।
ममता बनर्जी. फोटो सोर्स: गूगल
हाल ही में बंगाल में होते प्राॅक्सी मतदान की कुछ विडियो वायरल भी हुई थी पर उनकी सत्यता प्रमाणित नहीं हो पाई पर अब एक नई कहानी उभर कर आई है जिसे एक मतदाता ने ही लोगों तक पहुँचाया है।

हुआ क्या है?

पश्चिम बंगाल में एक मतदाता का नाम है – अनन्या जाना। इनके निर्वाचन क्षेत्र में कल मतदान हुआ था जिसके सन्दर्भ में अनन्या ने फेसबुक पर एक पोस्ट लिखी थी जिसमें लिखा हुआ है कि पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र खतरे में है और जब वो मतदान करने गई तो उसका और उसकी बहन का वोट जबरदस्ती तृणमूल कांग्रेस के पक्ष में दिया गया। इस दौरान वहाँ मौजूद अधिकारियों ने भी खामोश रहकर तृणमूल कार्यकर्ताओं का ही समर्थन किया।
अनन्या की यह पोस्ट अब फेसबुक से हट चुकी है, इसके लिए कोई सुरक्षा कारण उत्तरदायी है या फिर किसी दबाव में उन्होनें इसे डिलीट किया है, ये अब तक अज्ञात है पर उनकी इस पोस्ट को दिल्ली विश्वविद्यालय की एक छात्रा ने कॉपी कर लिया था तो आप सब भी पढ़िए, बंगाल में ममता की हिटलरशाही खुद अनन्या के शब्दों में :-
Democracy is in danger. Yes, in West Bengal
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So at 11 A.M today I went to the voting booth, with my family, which a primary school near my home in Haldia. The moment we entered and got our voting ink there was this guy who was standing right next to the EVM Machine, he asked my sister to vote for the first candidate, TMC. We being a little polite asked that guy to move because voting was our right, and a personal thing. Now that guy legit tried to push my sister. At this point we started shouting, we threatened him of harassing us physically. My elder sister threatened that guy by saying, “I am a woman, you are a man. Remember what is going to happen to you if you touch me forcefully”. And sister could cast her vote of her choice. Now this guy and some other guys called some women inside. When I started talking to the women, this lady pushed me and said ” I CAN TOUCH YOU AND YOU CAN DO NOTHING” . This continued for a while and finally the guy was successful in voting in our place. The Presiding Officers sat their in utter silence and so did the policemen who were standing outside. There were almost 30 people inside the booth who legit abused us and pushed us outside because we asked for our basic right to vote. This women even told us ” Where is it written that Voting is your right” and she fucking claimed to be a Lawyer. These men who were of my father’s age harassed us verbally saying they would break into our homes and, finish all of us. Women who were of my mother’s age pushed us out. Two guys even started following us.
Now my point is if this is the condition of West Bengal, then I am sorry to say that we are far away from democracy. If in a polling booth women are pushed by other women and harassed by males then I feel ashamed to be living in such a state. 
This is an open letter to our very prestigious Ms. CM, if this is how you win an election, then I am sorry but you have lost as a leader.

हम इस पोस्ट का हिंदी अनुवाद यहाँ लिख रहे हैं:

लोकतंत्र खतरे में है।  हाँ , पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र खतरे में है। 
ऐसा इसीलिए क्योंकि आज सुबह 11 बजे मैं अपने परिवार के साथ मतदान केंद्र पर गयी, जो हल्दिया में मेरे घर के पास एक प्राथमिक विद्यालय में था।  जिस क्षण हमने वहाँ प्रवेश किया और हमारी अँगुली में वोटिंग स्याही लगाई गई, उस वक्त ईवीएम मशीन के ठीक सामने खड़े व्यक्ति ने मेरी बहन को पहले उम्मीदवार के लिए वोट करने के लिए कहा जो तृणमूल कांग्रेस का था।
हमने थोड़ी विनम्रता के साथ उस आदमी को मतदान की निजता का हवाला देते हुए वहाँ से हटने को कहा पर अब उस आदमी ने मेरी बहन को धक्का देने की कोशिश की।  इसके बाद हम लोगों ने चिल्लाना शुरू कर दिया। मेरी बड़ी बहन ने उस आदमी को यह कहते हुए धमकाया कि “मैं एक औरत हूँ, तुम एक आदमी हो। याद रखो अगर तुम मुझे जबरदस्ती छुओगे तो तुम्हारे साथ क्या होगा।” अब उस लड़के और कुछ अन्य लोगों ने कुछ महिलाओं को अंदर बुलाया। जब मैंने महिलाओं से बात करना शुरू किया, तो उस महिला ने मुझे धक्का दिया और कहा “मैं तुम्हें छू सकती हूँ और तुम कुछ भी नहीं कर सकती हो”। 
यह कुछ समय तक जारी रहा और आखिरकार वह आदमी हमारी जगह मतदान करने में सफल रहा।  पीठासीन अधिकारियों और बाहर खड़े पुलिसकर्मियों ने पूरी तरह से चुप्पी साध ली। बूथ के अंदर लगभग 30 लोग थे, जिन्होंने हमारे साथ दुर्व्यवहार किया और हमें बाहर धकेल दिया क्योंकि हमने वोट देने का अपना मूल अधिकार माँगा था। उस महिला ने तो हमसे यह तक कहा कि “यह कहाँ लिखा है कि मतदान आपका अधिकार है” और उसने एक वकील होने का भी दावा किया। ये लोग जो मेरे पिता की उम्र के थे, ने हमें ये कहते हुए परेशान किया कि वे हमारे घरों में घुस जाएंगे और हम सभी को खत्म कर देंगे।  मेरी माँ की उम्र की महिलाओं ने हमें बाहर कर दिया और दो लड़कों ने भी हमारा पीछा करना शुरू कर दिया।
 अब मेरा ये कहना है कि यदि पश्चिम बंगाल की स्थिति ऐसी है तो मुझे यह कहते हुए खेद है कि हम लोकतंत्र से बहुत दूर हैं। अगर किसी पोलिंग बूथ में महिलाओं को दूसरी महिलाओं द्वारा धक्का दिया जाता है और पुरुषों द्वारा परेशान किया जाता है तो मुझे ऐसे राज्य में रहने में शर्म महसूस होती है।
यह हमारी बहुत प्रतिष्ठित सुश्री सीएम के लिए एक खुला पत्र है कि अगर इस तरह से आप चुनाव जीतते भी हैं, तो मुझे खेद है लेकिन आप एक नेता के रूप में हार गए हैं।
ये पोस्ट ये बताने के लिए काफी है कि बंगाल में लोकतंत्र का किस प्रकार गला घोटा जा रहा है और अधिकारी मौन बने हुए हैं और ये सब उस नेता के राज में हो रहा है जो खुद वामदलों द्वारा की जा रही कार्यकर्ताओं की हत्या के सामने झुके बिना प्रदेश की मुख्यमंत्री बनी है।
वैसे ये पहला मौका नहीं है जब ममता इस तरह के तानाशाही रवैये के कारण चर्चा में आई है। हाल ही में अपने रोड शो के दौरान ‘जय श्रीराम’ का नारा लगाने वालों को उन्होंने धमकाया था और बाद में उनमें से कुछ को गिरफ्तार भी किया गया। कुछ रोज पहले ही उनपर मीम बनाने वाली एक लड़की प्रियंका को भी गिरफ्तार कर लिया गया। ये सब ऐसे प्रमाण हैं जो साबित कर रहे हैं कि ममता अपने राज में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतंत्र का गला घोटने में लगी हुई हैं।
यह आर्टिकल द कच्चा चिटठा के लिए क्षितिज भट्ट ने लिखा है.

 

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