आज़ाद भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू से तो हम सभी देशवासी बखूबी वाकिफ हैं। जब बचपन में हम सब स्कूल में थे तो, 14 नवम्बर यानि कि चिल्ड्रेन डे के दिन हम सभी लड्डू खाने सुबह-सुबह स्कूल पहुँच जाया करते थे। सभी टीचर चाचा नेहरू के जन्मदिन को बच्चों के नाम कर उस दिन को खुशी के साथ सेलिब्रेट करते थे।

आज 27 मई है। साल 1964, 27 मई के दिन ही जवाहर लाल नेहरू की मौत हो गयी थी। नेहरू के मौत के बाद उनकी मौत के कारणों को लेकर दुनिया भर की अफवाहें देश-दुनिया में फैलाई गयी। इसलिए हमने सोचा कि आज मामला क्लियर कर देते हैं और आपको जानकारी भी दे देते हैं कि चाचा नेहरू आखिर किस वजह से चल बसे थे।

किन वजहों से हुई थी नेहरू की मौत?

आज अगर आप हमारे देश के पहले प्रधानमंत्री का नाम गूगल पर डालते हैं तो जवाहर लाल नेहरू से जुड़े कई ऐसी विडियो, कई ऐसे लेख सामने आ जाते हैं जिसमें उनकी अय्याशी, महिलाओं के साथ उनके संबंध, उनकी सेक्स लाइफ, उनकी सिगरेट पीने की आदत पर टिप्पणियाँ की गई हैं। कई जगह तो उन्हें चरित्रहीन भी बताया गया है।

पंडित जवाहर लाल नेहरू, फोटो सोर्स: गूगल

इंटरनेट पर नेहरू के खिलाफ झूठ फैलाने वाले अपने काम को लेकर लोग इतने सक्रिय हैं कि इनकी फैलाई झूठी बातें इंटरनेट के जरिये लाखों लोगों तक पहुँच गयी हैं। कई जगहों पर तो नेहरू की मौत की वजह को कई सारी औरतों के साथ सेक्स करने को बताया गया है। यूट्यूब पर कई ऐसे चैनल हैं जो बकायदा वेरिफिकेशन के साथ इन खबरों को चलाते हैं और लोगों के दिमाग में जहर बोते हैं।

पर आज 27 मई, पंडित जवाहर लाल नेहरू के पुण्यतिथि पर आपका ये सच जानना ज़रूरी है कि नेहरू के बारे में होने वाली इस तरह कि अभद्र बातों का उनके वास्तविक जीवन से कोई लेना-देना नहीं है।

सच तो ये है कि नेहरू की सेहत साल 1962 के बाद लगातार बिगड़ती जा रही थी। यह वही साल है जब चीन ने भारत पर हमला किया था जिसे नेहरू विश्वासघात मानते थे। ये भी कहा जाता है कि चीन के हाथों जबरदस्त हार मिलने के वजह से भी नेहरू काफी टूट गए थे। खराब तबीयत के चलते साल 1963 में नेहरू ने कुछ दिन कश्मीर में और कुछ दिन देहरादून में भी बिताए ताकि तबीयत में कुछ सुधार हो लेकिन इसका कोई फाइदा उन्हें मिल नहीं पाया। बाद में मई 1964 में वो देहरादून से दिल्ली लौट आए।

26 मई की रात नेहरू जब सोए तो, उनकी तबीयत ठीक थी पर अगली सुबह 6.30 बजे नेहरू ने बाथरूम से लौट कर पीठ में दर्द की शिकायत करी। शिकायत मिलने के बाद डॉक्टर बुलाए गए और उन्होंने नेहरू से बात भी की लेकिन तभी नेहरू बेहोश हो गए। इसी बेहोशी की हालत में उनकी मौत हो गयी।

27 मई, 1964 के दोपहर 2 बजे ऐलान किया गया कि 74 साल के नेहरू और देश के प्रथम प्रधानमंत्री नहीं रहे और उनकी मौत का कारण बताया गया हार्ट अटैक। 

74 साल की उम्र मे पंडित नेहरू चल बसे थे। दुनिया का कोई ऐसा बड़ा अखबार नहीं था जिसने नेहरू की मौत की खबर को अपने अखबार में न छापा हो लेकिन किसी भी अखबार में डॉक्टरों का ये बयान तो हरगिज नहीं पाया गया कि मौत का कारण सिफलिस, एसटीडी, गुप्त रोग या औरतों के साथ उनके संबंध या फिर उनकी अय्याशी है।

विदेशी अखबार की कटिंग, फोटो सोर्स: गूगल

तो इसलिए 14 नवम्बर को जब बाल दिवस आए तो अपने उसी उत्साह उसी सम्मान के साथ चाचा नेहरू को याद करें। लड्डू खाएं और झूठी खबरों पर विश्वास न करें।

पिछले कुछ सालों में देश के इतिहास और देश के पुराने लीडर्स के बारे में इंटरनेट के जरिये तमाम ऐसी झूठी खबरें फैला दी गई हैं जिन्हें देख कर अफसोस होता है। हम कोशिश करते रहते हैं कि आपको सही इतिहास से रूबरू करवाते रहें ताकि आप इन झूठी खबरों से बचे रह पाएँ।

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