अभी कुछ साल पहले एक मराठी फिल्म आई थी “सैराट”। जिसमें जातिगत भेदभाव, हिंसा, माँ-बाप का उनके लड़के-लड़कियों का प्यार एक्सेप्ट न करना, आदि चीजे दिखाई गयी थी। इस फिल्म में लड़की सवर्ण परिवार से आती है और दूसरी तरफ लड़का निचली जाति का होता है। इसलिए फिल्म के आखिर में वही होता जो अमूमन हमारे समाज में होता आ रहा है कि उन दोनों प्यार करने वालों को जान से मार दिया जाता है।

सिनेमा में जब दो पात्र आपस में प्यार करते हैं तब दर्शक बड़े आसानी से प्यार करने वाले जोड़े को हीरो और हीरोइन मान बैठते हैं और जो इसका विरोध करता है उसे विलेन। लेकिन जब यही किस्सा फिल्मी पर्दें से निकलकर हमारे सामने असल ज़िंदगी में आता है तब ठीक इसका उल्टा हो जाता है। उस वक्त हीरो-हीरोइन विलेन और फिल्मी विलेन को हीरो मान लिया जाता है।

ज्योंति और सोलाईराजन, फोटो सोर्स: गूगल
ज्योंति और सोलाईराजन, फोटो सोर्स: गूगल

अब आते हैं असल मुद्दे पर। तमिलनाडु से एक खबर आई हैं जहां दो प्यार करने वालों को एक-दूसरे के साथ ज़िंदगी बिताने का फैसला करना महंगा पड़ गया। क्योंकि उनके घर वालों को उनका रिश्ता मंजूर नही था। आज भी इंटरकास्ट मैरिज को हमारे समाज में गलत काम की तरह देखा जाता है। हमारे समाज में गलती से भी लड़की अपनी मर्ज़ी से शादी तो दूर किसी दूसरी जाति के लड़के को देख भी ले तो उसके लिए ये एक पाप बन जाता है।

तमिलनाडु के तूतुकुड़ी जिले में गुरुवार को कुछ गुंडे आकर एक शादी-शुदा जोड़े को मार देते हैं क्योंकि उन्होने इंटरकास्ट मैरिज की थी। वहाँ की पुलिस का यह कहना है कि ये एक ‘हेट क्राइम’ है। लड़की तीन महीने की गर्भवती थी लेकिन, फिर भी उन लोगों के पास इतनी संवेदना नहीं थी कि जिस लड़की को वह मार रहें हैं वो प्रेग्नेंट है। ऐसी भी कौन सी इज्ज़त लोगों के दिमाग़ में होती है कि वो उसके खातिर अपने परिवार के लोगों की जान लेने से पहले भी एक बार सोचते तक नहीं। इस पूरे मामले की पुलिस अपने तरीके से जांच कर रही है लेकिन यहाँ सवाल ये है कि आए दिन इस तरह की घटनाएं क्यों हो रही हैं? अगर आपके ज़हन में ये सवाल नहीं आ रहा है तो आपको अपनी संवेदनशीलता के बारे में सोचना चाहिए।

पुलिस की रिपोर्ट के हिसाब से लड़के का नाम सोलाईराजन (24) और लड़की का नाम ज्योति (21) है। ये दोनों ही दिहाड़ी मजदूर थे। पुलिस ने बताया कि, सोलाईराजन ‘परायर’ समुदाय से ताल्लुक रखता था और उसे ‘पल्लर’ समुदाय की लड़की ज्योति से प्यार हो गया। दोनों एक नमक की फैक्ट्री में साथ काम करते थे वहीं उन्हें प्यार भी हो गया। उन्होंने शादी करने का फैसला कर लिया। लेकिन ज्योति के घर वालों ने इस शादी का विरोध किया। जिसके बाद लड़की ने अप्रैल में अपना घर छोड़ दिया और अपने प्रेमी के साथ शादी कर ली। लड़के के घर वालों को उनकी शादी से कोई ऐतराज नहीं था। उन्होंने दोनों को स्वीकार भी कर लिया था।

आज हम जिस दौर में रह रहें हैं वहाँ बहुत हद तक समाज ने अपनी सोच बदल ली है लेकिन इसका प्रतिशत सिर्फ कुछ अंकों तक ही सीमित है इसलिए आज भी देश के कोने-कोने से दंगे-फसाद, धर्म के नाम पर झगड़ा, और कभी इंटरकास्ट मैरिज पर किसी की जान ले लेने जैसी खबरें आती रहती हैं। ऐसी घिनौनी और नफ़रत भरी घटनाएँ इन सो-कॉल्ड इज़्ज़तदार लोगों के लिए सांस लेने जैसा काम हो गया है। ऐसे में ये जाहिल लोग इस समाज को दीमक की तरह खोखला कर रहे हैं।

प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स :गूगल
प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स :गूगल

तमिलनाडु में ये दूसरी घटना है। इससे पहले इसी हफ्ते में एक और ऐसी ही घटना देखने को मिली जहां दो प्यार करने वालों को अपना प्यार महंगा पड़ गया। तमिलनाडु के कोयंबटूर में एक किशोरी नाम की लड़की के घर वालों ने एक 27 वर्षीय ऑटो ड्राइवर की पीट-पीटकर हत्या कर दी।

पुलिस के रिपोर्ट के अनुसार,  जिस लड़की के परिजनों ने इस घटना को अंजाम दिया, वह एक ऑटो चलाने वाले लड़के से प्रेम करती थी और इसी बात से घर के लोग नाराज थे। वह ऑटो ड्राइवर लड़का शनिवार-रविवार की रात को उस लड़की से मिलने जाता है, जहां लड़की के घर वाले उसे पकड़ कर बहुत मारते-पीटते हैं और हद्द से ज़्यादा मारने के कारण उस लड़के की मौके पर ही मौत हो जाती है।

ये कोई पहली बार नहीं है जब ऐसे ऑनर किलिंग के मामले सामने आए हैं। एक लंबे वक़्त से ऐसे मामले लगातार सामने आते रहे हैं। किसी मामले में दो प्रेम करने वालों को दिन दहाड़े पीट-पीट कर मार दिया जाता है, तो किसी मामले में उनकी लाश गाँव के पेड़ से लटकी मिलती है। कत्ल करने के तरीके चाहे जो हों, कत्ल का कारण हमेशा खानदान, परिवार और जाति की इज्ज़त ही होती है।

अगर इन मामलों की गहराई में उतरा जाये तो समझ में आएगा कि ये हमारे चारों तरफ है। हम गलती ये करते हैं कि इस मुद्दे के बारे में तभी बात करते हैं जब ये एक हिंसक रूप ले लेता है। अगर ध्यान दिया जाये तो छोटी-छोटी बातें मिल कर ही एक ऐसी मानसिकता बनाती हैं जो तलवार उठा कर अपने घर की बेटी का गला काटने से पहले एक बार भी नहीं सोचती।

अगर आप अपने घर की बेटी-बहन को किसी से शादी करने के लिए सिर्फ इसलिए रोक रहे हैं क्योंकि जो लड़का उसे पसंद है वो किसी दूसरी जाति का है तो आप भी उतने ही जाहिल हैं जितने कि वो, जो ऐसी हिंसक घटनाओं को अंजाम देते हैं।

कत्ल होना उतना खतरनाक नहीं है जितना इस घटिया सोच का हमारे समाज में इतने सालों तक इतने विकास के बाद भी पनपते रहना है। क्योंकि ये सोच तलवार उठाने वालों को तलवार उठाने की ताक़त देती है और उनके विवेक पर एक काली पट्टी बांध देती है जो उन्हें ज़िंदगी भर के लिए अंधा कर देती है।

जब तक हम इस सोच को नहीं बदलेंगे तब तक हजारों ज्योति और सोलाईराजन कत्ल होते रहेंगे और हम हाथ पर हाथ धरे देखते रहेंगे।

 

 

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