‘अजब संयोग’

आज एक बात साबित हो गई कि ‘चुनाव लड़ना मतलब, चूहे-बिल्ली जैसा संयोग’। वैसे तो ये संयोग हमेशा से हर चुनाव में चला आ रहा है। लेकिन इस बार के चुनाव में जैसे-जैसे उदाहरण और चीजें होती नज़र आ रही हैं। इसे मात्र संयोग तो नहीं समझा जा सकता, लेकिन जो भी हो। कमाल…के संयोग बनते दिख रहे हैं।

उदाहरण के लिए हमें देश के बड़े राज्यों में से एक, ‘मध्य-प्रदेश’ चलना होगा। जहाँ कुछ अजीबो-गरीब ही खेल हो रहा हैं। दिख कुछ और रहा है, पूछने पर बताया कुछ और जा रहा है और जो दिख रहा है, वो भी तो पचने जैसा नहीं है। इसलिए भईया यहाँ तो यही कहा जा सकता है कि ‘दाल में कुछ नहीं, बहुत कुछ काला है’

काँग्रेस की रैली में भगवा रंग

आपको हैडिंग पढ़ कर असहज होने की जरूरत नहीं है कि भला यह कैसे संभव है। हाँ, बात तो थोड़ी अजीब है लेकिन यही सच है। लेकिन, एक मिनट रुकिये। आपको ये बिलकुल भी सोचने की ज़रूरत नहीं है कि काँग्रेस ने कहीं अपना भगवाकरण तो नहीं कर लिया।

असल में बात ये हुई कि आज मध्य-प्रदेश की सबसे चर्चित लोकसभा सीट भोपाल से काँग्रेस के प्रत्याशी दिग्विजय सिंह का रोड शो था। जिनका मुक़ाबला बीजेपी की उस उम्मीदवार से है जिनके श्राप में इतनी ताकत मानी जा रही है कि अगर उन्होंने दिग्विजय को गलती से भी एक छोटा सा श्राप दे दिया तो, दिग्विजय का हाल ऐसा ही होगा जैसे आतंकियों से लड़ते हुए वीर हेमंत करकरे का हुआ था।

खैर, इस श्राप देने वाली महान स्त्री का नाम साध्वी प्रज्ञा ठाकुर है। अच्छा इस रोड शो में दिग्विजय का साथ देने एक और ज्ञानी शामिल थे जिन्हें आज कल के जमाने में ‘कम्प्युटर बाबा’ के नाम से जाना जाता हैं। हक़ीक़त में इनका नाम नमदास त्यागी है। खैर, आइये पहले हम घर वापसी करते हुए रोड शो की बात पर आते हैं।

असल में मुद्दा ये बना कि इन दोनों के रोड शो में जो पुलिसकर्मी ड्यूटि पर मौजूद थे। उन्होंने अपनी वर्दी के साथ भगवा स्कार्फ भी डाल रखा था। बस फिर क्या था, सोशल मीडिया के इस दौर में लोगो ने विडियो बनाया और नेट पर डाल दिया। जिस विडियो में इस प्रकार का मसाला हो, उसका वायरल होना तो लाज़मी था।

फिर हर जगह की तरह ANI का माइक यहाँ भी पहुँच गया। तैनात पुलिस कर्मियों से भगवा स्कार्फ पहनने पर सवाल पूछा तो जवाब मिला कि-

हम यहां कंप्यूटर बाबा द्वारा आयोजित रोड शो के लिए ड्यूटी पर हैं। इसे पहनने के लिए हमें कहा गया है। इसलिए हम इसे गले में डालने को मजबूर हैं

लेकिन जब उनसे पूछा गया कि ये ऑर्डर उन्हें किसने दिया और कहाँ से आया है तो उन्होने उस सवाल का जवाब न बताते हुए किनारा कर लिया।

खैर, इस पर पुलिस विभाग से जवाब मांगा गया तो उन्होंने एक अलग ही दावा पेश कर दिया कि जो लोग भगवा स्कार्फ में दिख रहे थे, वे वालंटियर थे, न कि पुलिस कर्मचारी। लगे हाथ, भोपाल के डीआईजी इरशाद वली का कलाम भी सुन लीजिए,

“हमने और कार्यक्रम के आयोजकों ने रैली के लिए स्वयंसेवकों का नामांकन किया था। हमें शाम को भी स्वयंसेवक मिलेंगे। स्वयंसेवक क्या पहनते हैं, इस पर हमें कुछ कहना नहीं है। जो सब-इंस्पेक्टर ड्यूटी पर थे, उन्होंने कोई स्कार्फ नहीं पहना था। वालंटियर पुलिस अधिकारी नहीं हैं”

इस रोड शो में दिग्विजय सिंह के साथ साधु-संत भी हैं। वे भोपाल की सड़कों पर घूमकर दिग्विजय के लिए वोट मांग रहे हैं। साधु संतों की इस टोली का नेतृत्व कंप्यूटर बाबा कर रहे हैं।

रैली से एक दिन पहले साधुओं ने कंप्यूटर बाबा की अगुवाई में हठयोग भी किया था। जिस मौके पर दिग्विजय सिंह भी आयोजन स्थल पर पधारे थे और हवन कुंड में आहूति दी थी।

जरा रुकिये, अभी इस रैली का पूरा शो ख़त्म नहीं हुआ। वो ऐसे कि दिग्विजय सिंह के इस रोड शो में कुछ लोगों को ‘मोदी भक्त’, सौरी ‘मोदी समर्थक’ बनना फिलहाल चाय की प्याली से महंगा पड़ गया है। दरअसल हुआ ये कि मोदी समर्थक एक टोली बनाकर वहाँ मौजूद थे। जैसे ही रोड शो उनके सामने से गुजरा उन लोगो ने वफादारी के तहत वही किया जो उनको करना चाहिए। इन लोगों ने ‘मोदी-मोदी’ के नारे लगा दिए। किसी ने शिकायत कर दी और बेचारों पर एफआईआर दर्ज हो गई है। शिकायत में कहा गया है कि, ‘वे लोग शांति से निकल रहे रोड शो में बाधा खड़ी करने के मकसद से ऐसा कर रहे थे’

ख़ैर जो भी हुआ, अच्छा नहीं हुआ। भोपाल लोकसभा सीट पर 12 मई को मतदान होना है। देखिए ऊँट किस करवट बैठता है।

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