एक बयान और फिर जमकर बवाल क्योंकि यह बयान था राहुल गांधी का। राहुल गांधी का बयान था कि भारत ‘मेक इन इंडिया’ की जगह ‘रेप इन इंडिया’ बन चुका है। अब यह कहना कितना सही है क्योंकि बीजेपी सरकार से कोई भी गलती हो ही नहीं सकती। उसका कोई भी बिल ‘रामबाण’ है। मतलब, अचल, अडिग और अखण्डनीय। इसलिए शीतकालीन सत्र के आखिरी दिन संसद में जमकर बवाल हुआ। राहुल गांधी माफी मांगो..राहुल गांधी माफी मांगो के नारे से पूरा संसद गूंज उठा है।

राहुल गांधी 12 दिसंबर को झारखंड के गोड्डा में थे। विधानसभा चुनाव को लेकर एक सभा को संबोधित कर रहे थे। अपने संबोधन में उन्होंने कहा,

नरेन्द्र मोदी ने कहा था मेक इन इंडिया। अब आप जहां भी देखो मेक इन इंडिया नहीं भैया अब है रेप इन इंडिया। अखबार खोलो, देखो झारखंड में एक महिला का बलात्कार। उत्तर प्रदेश में देखो नरेन्द्र मोदी के MLA ने महिला का रेप किया और फिर गाड़ी का एक्सीडेंट कर दिया गया। मोदी जी कहते हैं कि बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ लेकिन, मोदी जी यह भी बताओ की बेटियों को किससे बचाना है, बीजेपी के MLA से? 

बस यही भाषण है जिसके ऊपर इतना बवाल मचा हुआ है। राहुल गांधी ने अपने बयान में देश भर से आ रही रेप की घटनाओं पर सरकार के ऊपर सवाल उठाया है। राहुल गांधी विपक्ष के नेता हैं और उनका काम है सरकार पर सवाल उठाना। वही उन्होंने किया लेकिन,  संसद भवन में जिस तरह से स्मृति ईरानी ने चीख-चीख कर अपनी पार्टी की तालियां बटोरी वह शर्मनाक है। राहुल गांधी के बयान को जिस तरीके से पेश कर रही थीं, उससे तो यह लग गया कि एक नेता बनने के सारे गुण उनमें मौजूद हैं। राहुल गांधी कुछ कह रहे थे और स्मृति ईरानी ने पहले से ही सोच रखा था कि उन्हें संसद में बोलना क्या है, वही उन्होंने बोला भी। स्मृति ईरानी संसद में कह रही थीं,

एक पार्टी का नेता खुले तौर पर क्लेरियन कॉल देता है कि भारत में महिलाओं का रेप होना चाहिए। ये राष्ट्र के इतिहास में पहली बार हुआ है जब किसी भी पार्टी का नेता रेप जैसे संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति कर रहा हो। यह पहली बार हुआ है कि गांधी परिवार का कोई नेता देश की जनता को संदेश दे रहा हो कि देश की महिलाओं का बलात्कार होना चाहिए। 

इतना ही नहीं संसद में हल्ला होने के बाद स्मृति ईरानी और बाकी बीजेपी की महिला सांसदों ने चुनाव आयोग के पास शिकायत दर्ज करा दी। उनका कहना था कि राहुल गांधी माफी मांगें। स्मृति ईरानी जो कह रही हैं वह राहुल गांधी के शब्द तो बिल्कुल नहीं हैं। लेकिन, एक बार अगर बीजेपी भी पीछे मुड़कर देखती तो, शायद अपने ही बयान से बहुत कुछ सीख सकती थी। इतिहास तो नहीं कहेंगे क्योंकि यह बात साल 2013 की ही है। पीएम मोदी ने अपने भाषण में दिल्ली को ‘रेप कैपिटल’ बोला था। राहुल गांधी के बचाव में कांग्रेस ने यह वीडियो अपने ट्विटर से शेयर भी किया है। यह तो वही बात हो गई कि ‘आप करें तो रासलीला और हम करें तो, कैरेक्टर ढीला’

स्मृति ईरानी तक ही मामला रहता तो एक बात थी लेकिन, यह धीरे-धीरे आगे बढ़ता गया और राजनाथ सिंह से लेकर कई महिला सांसद भी राहुल गांधी पर बिफर पड़ीं। लॉकेट चटर्जी जो बंगाल से बीजेपी की सांसद हैं उनका कहना था कि

मोदी जी ने मेक इन इंडिया द्वारा मैसेज दिया कि भारत आइए और इन्वेस्ट कीजिए लेकिन, राहुल गांधी लोगों को भारत में रेप करने के लिए आमंत्रित कर रहे हैं। जो कि भारत का अपमान है।

इतना सब होने के बाद बीजेपी ने राहुल गांधी और कांग्रेस को सदन से बर्खास्त करने की मांग कर दी। राजनाथ सिंह ने भी राहुल गांधी के इस बयान को बुरा बताया। राजनाथ सिंह संसद में कह रहे थे,

कांग्रेस के जितने वरिष्ठ नेताओं ने इस तरह के बयानों का प्रयोग किया हो, उन्हें सदन से बर्खास्त कर देना चाहिए और उन्हें देश की जनता से माफी मांगनी चाहिए। 

लॉकेट बनर्जी जब लोकसभा में भाषण दे रही थी तो उसके पीछे एक चेहरा भी राहुल गांधी के खिलाफ नारेबाजी करता हुआ नज़र आ रहा था। यह चेहरा साध्वी प्रज्ञा का था। मतलब प्रज्ञा सिंह ठाकुर नाथूराम गोडसे को एक बार नहीं बल्कि जब भी चर्चा होती है देश भक्त बता देती हैं। वह बीजेपी को ठीक लगता है लेकिन, राहुल गांधी का पीएम मोदी के साल 2013 जैसा एक भाषण दे देना बीजेपी को नगवार गुजर रहा है। इस वक्त देश की जो स्थिति है उसके हिसाब से रेप जैसे शब्द सुनने की तो आदत हो जानी चाहिए इन नेताओं को। आज देश में हर 15 मिनट पर एक रेप जैसी घटना को अंजाम दिया जा रहा है।

राहुल गांधी ने भी ‘भारत बचाओ रैली’ को संबोधित करते हुए बयान दिया कि

कल बीजेपी के लोगों ने कहा कि आप अपने भाषण पर माफी मांगिए। भाईयों-बहनों मेरा नाम राहुल सावरकर नहीं है, मेरा नाम राहुल गांधी है और मैं सच बोलने के लिए माफी नहीं मांगूंगा।

स्मृति ईरानी का इस तरह से संसद में राहुल गांधी के बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश करने से अच्छा था कि वह राहुल गांधी के सवाल का जवाब देतीं। वह बतातीं कि सरकार देश में महिला सुरक्षा के लिए क्या कर रही है? क्योंकि कागजों में तो कई सारी योजनाएं हैं, अलग बात है कि इनकी जमीनी स्तर पर सच्चाई कुछ और ही है। जिस तरह से सरकार बाकी बिलों को विरोध के बावजूद पास कर दे रही है, उसी तरह उनकी सरकार छठे साल में है और इस तरह की घटनाओं से निपटने के लिए कितनी सफल रही है। ओला-उबर की वजह से ऑटो सेक्टर में मंदी है, गाय ऑक्सीजन देती है, इंडिया में मंदी है भारत में नहीं, जैसे कुतर्क भी दे सकती थी। ज्यादा से ज्यादा क्या होता, ट्रोल की जातीं।

रेप जैसे मुद्दे को राजनीतिक चोला पहनाने का काम राहुल गांधी ने नहीं बल्कि, स्मृति ईरानी ने किया है। लोकसभा चुनाव में जब स्मृति ईरानी ने अमेठी से राहुल गांधी को हराया तो, सबको इस बात की खुशी नहीं थी स्मृति ईरानी जीती हैं बल्कि, इस बात की खुशी थी कि एक महिला ने गांधी परिवार के किले को भेद दिया है। 78 महिला सांसद जब जीतकर संसद पहुंची तो, देश को लगा कि महिलाओं को लेकर इस बार कुछ अच्छा होगा। लेकिन, हुआ इसके ठीक उल्टा मतलब रेप की दर बढ़ती ही चली गई और इस पर राजनीति के अलावा कुछ नहीं हुआ।