बिरयानी, बड़े हीं शौक से खाया जाने वाला जायकेदार, लजीज व्यंजन। दिल्ली की, लखनऊ की, हैदराबाद की, दम की, चिकन की, मटन की, बड़े की और अब तो वेज भी, जाने कितने तरह की बिरयानी हमें देखने को मिल जाती हैं और खाने को भी। बिरयानी खाना और खिलाना दोनों हीं खूब मजे की चीज होती है लेकिन, हाल ही में जो बिरयानी खाई गयी वो थी कश्मीरी बिरयानी।

कश्मीर के सारे भसड़ के बीच कुछ तस्वीर और वीडियोज़ आती हैं। तस्वीर में देश के NSA अजित डोभाल कश्मीर के स्थानीय लोगों के साथ बिरयानी खाते दिखते हैं। बिरयानी खाने में कोई दिक्कत नहीं है। दिक्कत है बिरयानी खाने की जगह और समय में। जगह है कश्मीर और समय वह है जब कश्मीर से आर्टिकल 370 हटा दिया गया।

अजित डोवाल स्थानीय लोगों के साथ बिरयानी खाते हुए, फोटो सोर्स: गूगल

अजित डोभाल बिरयानी खाते हैं और स्थानीय लोगों के साथ बातें करते हैं। उनकी बातों में उर्दू की मात्रा ज्यादा होती है। वो कहते हैं-

आप बिल्कुल मुतमईन(इत्मीनान) रखें। आपकी हिफाजत, आपकी सलामती, यही हम लोग चाहते हैं कि यहाँ किसी तरह से खुशहाली हो आपके बच्चे सुकून से रहें, दुनिया में अपना नाम बना सकें। वो अपने मज़हब इस्लाम की हिफाजत कर सकें।

यह सब कुछ जब हो रहा था तब कोई अपने कैमरे से इसे कैद कर रहा था। इस तस्वीर को बाद में न्यूज़ एजेंसी ए. एन. आई ने ट्वीट किया। वीडियो देखने के बाद आपको यह अहसास होगा कि कश्मीर में सब कुछ सामान्य है।

जैसे हीं यह वीडियो सामने आया इसे खूब देखा और शेयर किया जाने लगा। कई भाजपा समर्थित फेसबूक पेज इसे शेयर करने लगें। इसी वीडियो के साथ कुछ और वीडियो और फोटोज़ शेयर की जाने लगीं। उनमें से एक वीडियो में अजित डोभाल सेक्यूरिटी फोर्सेज से बात करते हुए दिखाई दे रहे हैं। इन वीडियोज़ और फोटोज़ से यह बताने की कोशिश की जा रही थी कि घाटी में सब कुछ सामान्य है।

सोचने वाली बात यह है कि जिस जगह धारा 144 लागू हो, उस जगह बीच बाजार में बिरयानी खाई और खिलाई जा रही है। जहां वीडियो में साफ नज़र आ रहा है कि पीछे की सारी दुकानें बंद हैं। तस्वीर बनाने वाला कौन था? घाटी पूरी तरह से कटा हुआ था। वहाँ न फोन था, न हीं इन्टरनेट। फिर भी किसी ने फोन से वीडियो बनाकर भेज दिया ए एन आई जैसी संस्था को। वीडियो को ध्यान से देखने पर समझ आता है कि इसे बड़े आराम से बनाया गया है। जैसे वीडियो को लैंडस्केप मोड में न बनाकर, पोर्ट्रेट मोड में बनाया गया। इसके दो कारण हैं। एक कि आपको साफ-साफ दिखे कि सुरक्षा के कितने इंतजाम हैं। सिक्योरिटी फोर्सेज कितनी हैं? साधारण लोग कितने हैं?

दूसरी बात यह कि वीडियो बनाने वाले ने इस बात का पूरा ध्यान रखा है कि यह असली लगे। वीडियो कहीं से भी स्क्रिपटेड न लगे इस वजह से इसे पोर्ट्रेट मोड में बनाया गया है क्योंकि, ह्यूमन टेंडेंसी के अनुसार हम और आप फोन से वीडियो पोर्ट्रेट मोड में हीं शूट करते हैं।

फोटो जर्नलिस्ट एस पॉल की एक मशहूर तस्वीर है। उस तस्वीर में कुछ बच्चे स्कूल जा रहे हैं। जिन्हे सुरक्षाकर्मी घेरे खड़े हैं। फोटो के नीचे लिखा है “राजधानी में सबकुछ सामान्य है, दिल्ली।” कुछ ऐसी बात अजित डोभाल भी कश्मीर को लेकर कर रहे हैं।

वो सुरक्षाकर्मियों से मिलते हैं। तस्वीरे लेते हैं। शेयर करते हैं। पहले आप इन दोनों तस्वीरों को देखें-

पहली तस्वीर में अजित डोभाल सेंट्रल फ़ोर्सेज के साथ खड़े हैं।
इस तस्वीर में अजित डोभाल स्थानीय पुलिस से बात करते हुए दिख रहे हैं।

इन दोनों तस्वीरों में एक खास अंतर है। उपर की पहली तस्वीर जिसमें सेंट्रल फ़ोर्सेज दिख रहे हैं, उन सभी के हाथों में हथियार हैं लेकिन, नीचे की तस्वीर में दिखने वाली स्थानीय पुलिस निहत्था खड़ी है।

तस्वीरों का इस्तेमाल बखूबी तरीके से किया जा रहा है। यह नया नहीं है। 2013 में कई देशों ने इजरायल सरकार के विदेश मंत्रालय का येरूसलम से मीडिया प्रेजेंटेशन देखा था। उस प्रेजेंटेशन में इज़राइली विदेश मंत्रालय के अधिकारी आम नागरिक बन कर सोशल मीडिया पर आने के बारे में बता रहे थे। उन्होंने बताया कि यह सब कुछ उन्होंने आम पलस्तीनी नागरिकों से मेल जोल बढ़ाने के लिए था ताकि हम इजरायल और इजराइलियों के लायक माहौल बना सकें।

यह तरीका 2013 में इजरायल द्वारा अपनाया गया था। यदि कश्मीर में आज NSA अजित डोभाल को देखें तो यह कुछ ऐसा हीं प्रकरण लगता है।

स्टोरी के इनपुट्स 'द वायर' से लिए गए हैं। 

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