बीजेपी, विनायक सावरकर को हिंदुत्व का दर्जा देती है और उनके नाम के आगे वीर लगाकर उनका सम्मान प्रदर्शित करती है। वहीं कांग्रेस सरीखे लोग उनको हत्यारा और आरोपी कहते हुये फिरते हैं। कांग्रेस पार्टी उनके वीर होने पर सवाल उठाती है। इसका एक बड़ा कारण है, गांधीजी की हत्या में उनका नाम होना। महात्मा गांधी के हत्या में जिन नौ लोगों का नाम था, उनमें वी. डी. सावरकर भी थे।

सावरकर। फोटो सोर्स: गूगल

विनायक दामोदर सावरकर, फोटो सोर्स – गूगल

महात्मा गांधी की हत्या के बाद विनायक सावरकर को हिरासत में ले लिया गया था। जहां उन्होंने बंबई पुलिस आयुक्त को पत्र लिखा।

इसमें उन्होंने कहा कि –

“यदि मुझे रिहा कर दिया जाता है तो सरकार जब तक चाहेगी। मैं राजनैतिक और सांप्रदायिक गतिविधियों से दूर रहूंगा।”

उनके इस बयान से उन पर शक और अधिक बढ़ गया। लेकिन उनके खिलाफ ऐसे कोई सबूत नहीं मिले जिससे उनको हत्या का दोषी माना जाता। इसलिए उनको रिहा कर दिया गया।

गवाह ने दिया था सावरकर का नाम

गांधीजी के हत्या के मामले में नौ लोगों को गिरफ्तार किया गया था। जिसमें नाथूराम गोडसे, उनके भााई गोपाल गोडसे के अलावा सावरकर भी शामिल थे। उन नौ लोगों में से एक आरोपी पुलिस को गवाही देने के लिए राजी हो गया था। उस गवाह का नाम था- दिगंबर रामचन्द्र बडगे

रामचंद्र बडगे ने अदालत की गवाही में कहा था कि इस साजिश में सावकरकर भी शामिल थे। बडगे ने अपने बयान में बताया था कि वह अपने साथी के साथ बंबई में सावरकर के घर गया था। जहां उन्होंने इस साजिश की पूरी प्लानिंग की थी। सावरकर ने ही उनको हथियार मुहैया करवाये थे। सावरकर ने उनको कहा था कि इस बार गांधी और नेहरू को खत्म हो जाना चाहिए।

गांधी और सावरकर, फोटो सोर्स – गूगल

गांधी और सावरकर, फोटो सोर्स – गूगल

सावरकर हुए बरी

गवाह बडगे ने सावरकर को इस केस में शामिल तो बताया लेकिन उनके साथ बडगे ने अपना रिश्ता एक साथी वाला नहीं, एक अनुयायी वाला बताया। जिसके अनुसार वे सिर्फ उनके लिए गुरू थे। वहीं नाथूराम गोडसे की गवाही ने सावरकर को बचा लिया।

गोडसे ने कहा था –

‘‘1947 में ही हमने वीर सावरकर के नेतृत्व को छोड़ दिया था और उनसे भविष्य की योजनाओं-नीतियों पर सलाह लेना बंद कर दिया था। मैं दोबारा यह कहना चाहता हूं कि यह बात सही नहीं हैं कि वीर सावरकर को मेरी गतिविधियों के बारे में कोई जानकारी थी और जिन पर आगे बढ़ते हुए मैंने गांधी जी की हत्या की।’’

अदालत ने नाथुराम की इस गवाही के आधार पर सावरकर को उनके दोष से मुक्त कर दिया। बडगे के पास बयान तो था लेकिन वो पुख्ता सबूत नहीं थे जिनके आधार पर उनको सजा सुनाई जा सके। इसलिए अदालत ने सावरकर को बरी कर दिया। सावरकर का यह केस हमेशा एक मिथक रहा। बीजेपी सावरकर को सच्चा भक्त और कांग्रेसी उनको हत्यारा मानती आ रही है। बाकी यह विषय आज भी संशय और मिथक भरा है कि सावरकर गांधीजी की हत्या में शामिल थे या नहीं?

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द कच्चा चिट्ठा के लिए ये आर्टिकल ऋषभ देव ने लिखा है