जाकिर हुसैन देश के राष्ट्रपति थे अचानक उनकी मृत्यु हो गई। तब उपराष्ट्रपति थे वी.वी. गिरि। वी.वी गिरि ने कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्यभार संभाल लिया। इंदिरा गांधी ने वी.वी. गिरि को निर्दलीय पर्चा भरने को कह दिया। वी.वी. गिरि  इंदिरा गांधी के आश्वस्त व्यक्ति में से थे। उन्होंने उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दिया और निर्दलीय राष्ट्रपति पद से पर्चा भर दिया।

इंदिरा गांधी के कारण बने थे राष्ट्रपति। फोटो सोर्स: गूगल

तब कांग्रेस के अध्यक्ष थे के कामराज। जिन्हें राजनीति का ‘चचा’ माना जाता था। तीसरे राष्ट्रपति जाकिर हुसैन के समय उनकी नहीं चल पाई थी और वे नहीं चाहते थे कि इस बार भी ऐसा ही हो। कांग्रेस की ओर से नीलम संजीव रेड्डी को उम्मीदवार बनाया गया। कांग्रेस की मीटिंग में इंदिरा गांधी जातीं लेकिन, उनका दिमाग कहीं और था।

वोटिंग के एक दिन पहले इंदिरा गांधी ने कांग्रेस के सांसदों और विधायकों को संबोधित करते हुये कहा कि अपना वोट अंतरआत्मा की आवाज से देना। वहीं खेल बदल गया।

वोटिंग हुई। पहली पेटी खुली। उसमें न संजीव रेड्डी जीते और न ही वी.वी. गिरि। दूसरी पेटी खुली तो सब भौचक्के रह गये क्योंकि रेड्डी चुनाव हार गये थे और वी.वी. गिरि इंदिरा गांधी की कृपा से देश के चौथे राष्ट्रपति भी बन गये।

जब सुप्रीम कोर्ट गये राष्ट्रपति

चुनाव के बाद कोर्ट में वी.वी. गिरि पर मुकदमा कर दिया गया कि उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव में धांधली की है। उस समय तक वी.वी. गिरि राष्ट्रपति की शपथ ले चुके थे यानि कि देश के सबसे बड़े पद पर काबिज हो गये थे।

सुप्रीम कोर्ट ने उनके बयान दर्ज करने के लिये कमिश्नर को कहा था। कमिश्नर राष्ट्रपति भवन उनके बयान को दर्ज के लिये जाने वाले ही थे कि वी.वी. गिरी ने सुप्रीम कोर्ट में जाने की इच्छा प्रकट की। जब राष्ट्रपति हाजिर हुए तो सुप्रीम कोर्ट ने उनके पद की गरिमा का ध्यान रखा।

अदालत के प्रति गिरि के दिल में अतिशय सम्मान के कारण ऐसा हुआ। गिरि मजदूर नेता, केंद्र सरकार में मंत्री और उपराष्ट्रपति भी रह चुके थे। कोर्ट में राष्ट्रपति के बैठने की सम्मानजनक व्यवस्था की गयी थी। वह एक सोफानुमा बड़ी कुर्सी पर बैठे थे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here