साोनिया गांधी, जिन्हें आज भारतीय राजनीति का पुरोधा माना जाता है। आज भी वह राजनीति में उतनी ही सख्त मानी जाती हैं जैसी वे अपने राजनैतिक शिखर के तौर पर जानी जाती हैं। उन पर राजनीति में विदेशी महिला जैसे बयान हमेशा बने रहे। लेकिन, उनके अंदर कभी पद पर बने रहने की लालसा नहीं आई। जब उनके पास प्रधानमंत्री बनने का मौका था तो उन्होंने पार्टी के वफादार को उस पद पर बैठाकर अपनी सोच को जाहिर किया।

सोनिया गांधी, फोटो सोर्स- गूगल

सोनिया गांधी, फोटो सोर्स- गूगल

सोनिया गांधी के बारे में राजनैतिक परिपेक्ष्य से ऐसे कह सकते हैं कि उन्होंने अपने समय में कांग्रेस को संगठित किया और पार्टी को वैसा चलाया जैसा वे चाहती थीं। सोनिया गांधी कांग्रेस की नहीं, देश की सशक्त महिलाओं में से एक हैं। लेकिन, सोनिया गांधी के बारे में आज बात क्यों? तो जवाब है कि आज सोनिया गांधी का जन्मदिन है।

जब सोनिया गांधी कांग्रेस अध्यक्ष बनीं थीं वैसे यह कहना सही नहीं होगा कि वो कांग्रेस अध्यक्ष बनीं थीं क्योंकि, वो अपनी मर्जी से अध्यक्ष नहीं बनीं थीं, उनके अध्यक्ष बनने की घोषणा कर दी गई थी। जिसे उन्होंने अस्वीकार कर दिया था।

‘‘मैं अपने बच्चों को भीख मांगते हुये देख लूंगी, लेकिन कभी राजनीति में कदम नहीं रखूंगी।’’                                       

– 22 मई 1991 के दिन सोनिया गांधी।

सोनिया गांधी अपने बच्चों के लालन-पोषण में लग गईं। 1996 में आम चुनाव हुये और कांग्रेस की बुरी तरह हार हुई। कांग्रेस बिना नेहरू-गांधी परिवार के अपने आप को असहज महसूस कर रही थी। जिसके बाद सोनिया गांधी पर कांग्रेस में आने का दबाव डाला गया और आखिरकार 1997 में उन्होंने कोलकाता के सेशन में कांग्रेस की सदस्यता ली और सदस्यता लेने के 62 दिनों के बाद 1998 में कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष भी बन गईं।

विपक्ष  उड़ाता रहा हंसी

सानिया गांधी इटली से होने के कारण विपक्ष उनकी हंसी-ठिठोली करता रहा। उनकी टूटी-फूटी हिंदी का भी मजाक उड़ाता। लेकिन, उन्होंने और न ही उनकी पार्टी ने इसको कभी अपनी कमजोरी बनने दिया। वे आगे बढ़ती रहीं और कांगेस को भी आगे बढ़ाती रहीं। 1999 में अपने पति की सीट अमेठी से चुनाव लड़ा और तीन लाख वोटों से जीता भी। उसके बाद 1999 की लोकसभा में विपक्ष की नेता चुनी गईं।

मनमोहन सिंह को बनाया प्रधानमंत्री

2004 में लोकसभा चुनाव हुये। सोनिया गांधी ने पूरे देश में घूमकर प्रचार-प्रसार किया। सबको लग रहा था कि अटल बिहारी वाजपेयी की अगुवाई में कांग्रेस ही जीतेगी। लेकिन, जब नतीजे आये तो सब चौंक गए। यूपीए को 200 से अधिक सीटें मिलीं थी। 16 पार्टियों से गठबंधन करके कांग्रेस सरकार आनी पक्की थी। सोनिया गांधी प्रधानमंत्री बन भी सकती थी।सोनिया गांधी ने विवाद से दूर रहने के लिये, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को बना दिया।

मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी, फोटो सोर्स- गूगल

मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी, फोटो सोर्स- गूगल

2009 में दोबारा चुनाव हुये। फिर से वही परिणाम आये और मनमोहन सिंह दोबारा प्रधानमंत्री बने रहे। लेकिन, कहा जाता है कि मनमोहन सिंह वही करते थे जो सोनिया गांधी कहती थीं। 2014 में मोदी लहर के सामने उनका नेतृत्व फीका पड़ गया और कांग्रेस बुरी तरह से हार गई लेकिन, वो आज भी कांग्रेस को मजबूत बनाने में लगी हुईं हैं।

‘द कच्चा चिट्ठा’ के लिए यह आर्टिकल ऋषभ देव ने लिखा है।