सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद अहम फैसले में अयोध्या की विवादित ज़मीन राम लला विराजमान को देने का निर्णय सुनाया है। इसके साथ ही मुसलमानों को मस्जिद बनाने के लिए 5 एकड़ ज़मीन अलग से दी जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फ़ैसले में कहा है कि मंदिर बनाने के लिए तीन महीने के अंदर एक ट्रस्ट बनाया जाएगा।

पर राम मंदिर आंदोलन के वो भाजपा नेता लोग आज कहां हैं? जिन्होंने भारत की राजनीति को हमेशा के लिए बदल दिया था? जिस आंदोलन के बाद भारतीय जनता पार्टी का लगातार उदय हुआ, कांग्रेस पतन की तरफ बढ़ती रही।

कल्याण सिंह

6 दिसंबर 1992 में जब बाबरी मस्जिद को गिराया गया था, तब कल्याण सिंह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। ढांचा गिराए जाने के बाद कल्याण सिंह की सरकार गिर गयी। 2014 में मोदी सरकार बनते ही उन्हें राजस्थान के राज्यपाल के रूप में कार्यभार सौंपा गया। इसी साल सितंबर में राज्यपाल के तौर पर उनका कार्यकाल खत्म हुआ है और उनके ऊपर फिर से कोर्ट का ट्रायल शुरू हो गया है।

गोविंदाचार्य और प्रवीण तोगड़िया

गोविंदाचार्य आज गुमनाम हैं। एक वक़्त वो भाजपा के सबसे ताकतवर महासचिवों में से थे लेकिन, अटल बिहारी वाजपेयी के साथ हुए मतभेदों के बाद, उन्हें पार्टी से साइड लाइन किया जाने लगा। बाद में साल 2007 में उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया, जिसके बाद से वो गुमनामी का जीवन बिता रहे हैं।

प्रवीण तोगड़िया को भी मोदी के साथ मतभेदों के कारण इस्तीफा देने पर मजबूर किया गया। तोगड़िया गुजरात के दिनों से नरेंद्र मोदी के साथ थे।

राम मंदिर निर्माण मुहिम के दो मुख्य चेहरे लाल कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी, तस्वीर इंटरनेट से साभार
लाल कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी, तस्वीर इंटरनेट से साभार

लाल कृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी

एक दौर में आडवाणी और जोशी, मंदिर मुहिम का चेहरा हुआ करते थे। आडवाणी ने सितंबर 1990 में रथ यात्रा निकाली ताकि कारसेवक राम मंदिर के निर्माण में हिस्सा ले सकें। लेकिन साल 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनते ही दोनों पब्लिक स्पेस में कम दिखाई देने लगे। उन्हें भाजपा की संसदीय समिति से भी हटा दिया गया। बाद में दोनों को पार्टी के ‘मार्गदर्शक मंडल’ में डाल दिया गया। मुरली मनोहर जोशी तो अक्सर सभाओं में बोलते पाए जाते हैं लेकिन, पार्टी के मौजूदा मुखिया पर कुछ भी बोलने से बचते हैं। आडवाणी ऐसी सभाओं से भी दूरी बनाकर रखते हैं, कैमरे पर कुछ नहीं बोलते और ज़्यादातर वक़्त अपने परिवार के साथ बिता रहे हैं।

विनय कटियार

जब ढांचा गिराया गया था तब ओबीसी नेता विनय कटियार फ़ैज़ाबाद से सांसद थे। मंदिर आंदोलन चलाने के लिए कटियार ने ही 1984 में बजरंग दल और वीएचपी यूथ विंग की शुरुआत की थी मगर, इन दोनों संस्थाओं की आज कोई मौजूदगी नहीं है।

राम मंदिर निर्माण मुहिम में सक्रिय रही उमा भारती, तस्वीर इंटरनेट से साभार
उमा भारती, तस्वीर इंटरनेट से साभार

उमा भारती

वाजपेयी और आडवाणी युग से उमा भारती मंदिर आंदोलन का मुख्य चेहरा थीं। उमा भारती ने कई बार ये बात खुद स्वीकार की है कि बाबरी मस्जिद गिराए जाने में वो शामिल थीं। 2014 में बीजेपी में मोदी युग शुरू होने के बाद, उन्हें केंद्रीय मंत्री बनाया गया लेकिन, इस साल हुए लोकसभा चुनाव से वो बाहर हो गईं, उन्हें पार्टी ने टिकट नहीं दिया। उमा भारती वर्तमान में भाजपा की उपाध्यक्ष हैं लेकिन, पार्टी में उनकी ख़ास दखल नहीं है।

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