अगर आपको याद होगा तो यूपी में गोरखपुर के मेडिकल कॉलेज में 60 बच्चों की मौत हो गयी क्योंकि अस्पताल में ऑक्सीजन की सप्लाई रोक दी गयी थी। घटना अगस्त 2017 की है जहां ऑक्सीजन की सप्लाई रोकने का कारण था पैसों का भुगतान न किया जाना। अब ऐसे में एक डॉक्टर को न जाने क्या सूझा कि उसने अपनी जेब से पैसे भर के ऑक्सीजन की व्यवस्था की। ओवर टाइम किया लेकिन जब सरकार को इस डॉक्टर को सम्मानित करना चाहिए था तब सरकार इस बात से ही मुकर गयी कि बच्चों की मौत का कारण ऑक्सीजन की कमी है।

फिर इस मामले में डॉ कफील खान पर अपनी ड्यूटी ढंग से न निभाने और प्राइवेट प्रैक्टिस करने का आरोप लगा। आईपीसी की धारा 409, 308, 120बी, 420, प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट, आईपीसी का सेक्शन 8 और इंडियन मेडिकल काउंसिल एक्ट 1956 के सेक्शन 15 के तहत डॉ कफील के नाम एफ़आईआर दर्ज कराई गयी थी। 2 सितंबर को कफील को अरेस्ट कर लिया गया।

डॉ कफील खान, फोटो सोर्स: गूगल

दिल्ली के एम्स में भी डॉक्टरों ने इस गिरफ्तारी का विरोध किया था और कहा था कि सरकार अपनी गलती का इल्ज़ाम डॉक्टर पर लगा रही है। लेकिन इन बातों से कोई फर्क कहांं पड़ता है। हमारी सरकार कभी कोई गलती करती ही कहाँ है। खैर, बच्चों की मौत हो गयी। डॉ. को जेल जाना पड़ा।

सरकार ने अपनी गलतियों को छुपाने के लिए डॉ. कफील की ज़िंदगी इतनी मुश्किलों से भर दी है कि उन्होंने अपनी तकलीफ जाहिर करने के लिए योगी सरकार को 25 खत लिखे हैं लेकिन, जैसे कानून अंधा होता है वैसे ही मौजूदा सरकार के पास भी कान नहीं है। सरकार ने अब तक डॉ. कफील की एक भी बात पर अपना मुंह नहीं खोला है।

कफील खान ने मीडिया से हुई बातचीत में बताया कि उनके ऊपर लगे आरोपों की वजह से उनके परिवार को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। डॉ कफील खान गोरखपुर के बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज में बाल रोग विशेषज्ञ के तौर पर काम किया करते थे। कफील ने बताया है कि वो यूपी सरकार के सीनियर अधिकारियों और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ को 25 से ज़्यादा लेटर लिख चुके हैं। लेकिन अफसोस, अब तक उनकी एक भी अर्ज़ी का जवाब देने का वक़्त सरकार को नहीं मिल पाया है।

यूपी के सीएम योगी अदित्या नाथ, फोटो सोर्स: गूगल

डॉ. कफील का कहना है कि उन पर लगे हुए सस्पेंशन को हटाया जाए या फिर उन्हें टर्मिनेट कर दिया जाए। दरअसल डॉ. कफील खान और अस्पताल में हुई बच्चों की मौत पर निर्धारित एक फिल्म बनाई जा रही है। डॉ. साहब इसी मूवी की स्क्रीनिंग पर कोलकाता पहुंचे थे।

स्क्रीनिंग के बाद डॉ. कफील ने एक लेक्चर भी दिया जिसमें उन्होंने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के बदतर होते हालात के बारे में बात की।

डॉ. कफील ने बताया कि:

“मुझे सस्पेंड हुए करीब 2 साल हो चुका है। मेरे पास आमदनी का कोई साधन नहीं है। मैंने कुछ भी गलत नहीं किया है। मुझे अपने परिवार के लिए कमाने का मौका मिलना चाहिए।”

कफील ने आगे बताया कि उनके पास काफी ज़मीनें हैं जो वो कम दामों में बेचने की कोशिश भी कर रहे हैं लेकिन कोई उनसे ज़मीन खरीदना नहीं चाहता। कफील कहते हैं कि उनपर लगे आरोपों की वजह से कोई उनसे रिश्ता नहीं रखना चाहता।

इस दर्दनाक हादसे और सरकार की लापरवाही की वजह से डॉ. कफील और 8 अन्य लोगों को 60 बच्चों की मौत के आरोप में जेल जाना पड़ा था। डॉ कफील को बेल तो मिल गयी लेकिन उन्हें करीब 8 महीने जेल में काटने पड़े। इस हादसे की असली वजह ये थी कि यूपी सरकार ने अस्पताल में ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी के 68 लाख रूपये बकाया रखे थे। जिसके कारण कंपनी ने ऑक्सीजन की सप्लाई बंद कर दी।

मीडिया में भी तमाम रिपोर्टर्स को देखा जा सकता है जो सरकार की तरफदारी करते-करते नैतिकता को भूल ही गए हैं। अभी हाल ही में बिहार के मुजफ्फरपुर में जब बच्चे बुखार से मर रहे थे। तब देखा गया कि टीवी पर अपना शो चलाने के लिए किस तरह न्यूज़ एंकर सरकार की लापरवाही का जिम्मा डॉक्टरों पर डाल रहे थे।

एक डॉक्टर अपने जीवन के कई साल दे कर पढ़ाई करता है ताकि वो लोगों का इलाज कर सके। फिर डॉ कफील जैसे डॉक्टर तो सच में भगवान का रूप ही हुए जो ज़रूरत पड़ने पर अपनी जेब से पैसे दे कर मरीजों के लिए ऑक्सीजन की व्यवस्था करने का हौसला रखते हैं। लेकिन अफसोस, यूपी में ऐसे व्यक्ति को जेल जाना पड़ा वो भी सरकार की गलतियों की वजह से। ये बेहद निंदनीय है। ऐसा किया जाना कहाँ तक सही है कि पहले तो सरकार की लपरवाही की सज़ा डॉक्टर को दी गयी। अब उसके बाद आज जो कुछ भी परेशानियाँ कफील के परिवार को झेलनी पड़ रही हैं उसकी ज़िम्मेदारी कौन लेगा? कम से कम योगी जी को चिठ्ठियों का जवाब तो देना ही चाहिए।