मेरे सामने दो तस्वीरें एक साथ गुजर रही हैं। एक तस्वीर दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान की है। जहां एक नेता का शव सफेद धोती और रेशमी चादर में लिपटा हुआ है। लेकिन सियासत तो देखिये। उस नेता का दाह संस्कार कहां हो उस पर भी राजनीति चल रही है। दूसरी तस्वीर कुछ दिनों के बाद की है। उसी नेता का दाह संस्कार किया जा चुका था, चिता जल रही थी। तभी उस रात टी.वी. चैनलों पर एक दृश्य दिखाया गया। जिसमें अधजला शव दिखाया जा रहा था। जिसमें उनकी खोपड़ी दिख रही थी, आवारा कुत्ते चिता पर झपटने की कोशिश में लगे थे। ये उस नेता की चिता थी जिसने कई सालों तक देश के सबसे बड़े पद को संभाला था। उस चिता के पास कोई नहीं था वैसे ही जैसे असल जिंदगी में उस नेता को नेपथ्य में डाल दिया गया था। आज तब की बात में किस्सा पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव के अधजले शव और उस पर हुई गंदी राजनीति का।

नवंबर 2004

कांग्रेस सत्ता में है और सोनिया गांधी अपने राज में जी रहीं हैं। जो नहीं है वो है नरसिम्हा राव का दौर। प्रधानमंत्री का पद भी नहीं है, कांग्रेस अध्यक्ष भी नहीं रहे और सियासत तो न जाने कब से दूर हो गई है। अब नरसिम्हा राव बीमार रहने लगे हैं। इसी के कारण उनको एम्स में भर्ती कराया गया है। 23 दिसंबर 2004 का दिन है और सुबह के 11 बजते ही सूचना आती है कि पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव नहीं रहे। उनका पूरा परिवार शोक में आ गया लेकिन इसके बाद जो हुआ वो बेहद बुरा हुआ। अब सियासत की बारी आई।

Image result for narsimha rao deathगृहमंत्री शिवराज पाटिल ने राव के सबसे छोटे बेटे प्रभाकर को कहा, ‘पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार हैदराबाद में किया जाना चाहिए’। लेकिन राव का परिवार चाहता था कि अंतिम संस्कार दिल्ली में ही हो। हैदराबाद नरसिम्हा राव का गृह राज्य है लेकिन 1970 के बाद से दिल्ली ही उनकी कर्मभूमि थी। पहले इंदिरा गांधी के साथ काम किया, उसके बाद राजीव गांधी के साथ और फिर खुद प्रधानमंत्री बने। ये सुनकर हमेशा शांत रहने वाले शिवराज पाटिल ने झल्लाते हुए कहा, ‘कोई नहीं आएगा’

इसके बाद कांग्रेस के नेता गुलाब नबी आजाद भी वहां पहुंचे और कहा, राव का पार्थिव शरीर हैदराबाद ले जाना चाहिये। तभी प्रभाकर के मोबाइल पर ऐसे शख्स का फोन आता है। वो शख्स आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाई. एस. राजशेखर रेड्डी हैं। रेड्डी ने फोन पर प्रभाकर से कहा, मुझे अभी-अभी पता चला। मैं अनंतपुर के पास हूं और शाम तक दिल्ली पहुंच जाऊंगा। मैं आश्वसान देता हूं कि हम उनकी अंत्येष्टि पूरी भव्यता से करेंगे।’ ये सब इसलिये हो रहा था क्योंकि एक महिला नहीं चाहती थी कि नरसिम्हा राव का दाह संस्कार दिल्ली में हो।

शाम के वक्त सोनिया गांधी, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और प्रणव मुखर्जी राव के आवास पर पहुंचते हैं। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह प्रभाकर से पूछते हैं, ‘आप पार्थिव शरीर का क्या करना चाहते हैं’। प्रभाकर ने कहा, ये लोग चाहते हैं कि अंतिम संस्कार हैदराबाद में हो। उनकी कर्मभूमि दिल्ली थी। आपको कैबिनेट को इस बात के लिए राजी करना करना चाहिए। मनमोहन सिंह ने बस सिर ही हिलाया, कुछ बोले नहीं। बगल में सोनिया गांधी खड़ीं थीं जो इस बातचीत के दौरान चुप ही रहीं। ये खामोशी ही थी जो राव का दाह संस्कार दिल्ली में नहीं हो पा रहा था।

Image result for sonia gandhi and narsimha rao

राव के परिवार को राजी करने का जिम्मा आध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाई. एस. रेड्डी को दिया गया। दिल्ली पहुंचकर उन्होंने राव के परिवार से कहा, ‘मेरा भरोसा कीजिए, वहां हमारी सरकार है। शव को हैदराबाद ले जाने दीजिए, हम वहां उनका भव्य स्मारक बनायेंगे।’ राव का परिवार चाहता था स्मारक दिल्ली में ही बने। कांग्रेस नेताओं ने इसके लिये हामी भी भर दी लेकिन राव के परिवार को इन नेताओं पर विश्वास नहीं था। उन्हें विश्वास था तो बस एक ही शख्स पर, जो नरसिम्हा राव का बड़ा करीबी भी था और विश्वसनीय भी। रात को पूरा परिवार मनमोहन सिंह से मिलने पहुंचा।

रात को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अपने लिबास सफेद कुर्ता और पायजामे में थे। शिवराज पाटिल ने मनमोहन सिंह को दिल्ली में स्मारक बनाये जाने की बात बताई। मनमोहन सिंह ने कहा, ‘कोई बात नहीं। हम यह कर लेंगे‘। प्रभाकर ने बाद में बताया, ‘हमें तभी एहसास हो गया था कि सोनिया जी नहीं चाहतीं कि पिताजी का अंतिम संस्कार दिल्ली में हो। वह दिल्ली में स्मारक नहीं बनने देना चाहती थीं। वह नहीं चाहतीं थीं कि उन्हें भारतीय नेता के रूप में देखा जाए’।

Image result for narsimha rao and manmohan singh24 दिसंबर, 2004

दिल्ली में ही नरसिम्हा राव को श्रद्धांजलि देने देश भर के नेता आये। उसके बाद शव को राष्ट्रीय ध्वज में लपेटा गया और उसे फूलों से सजी गाड़ी में रखा गया। शव यात्रा मोतीलाल मार्ग से हवाई अड्डे की ओर बढ़ने लगी। रास्ते में कांग्रेस मुख्यालय था। अब तक ऐसा होता था कि कांग्रेस के बड़े नेता का शव कांग्रेस मुख्यालय जरूर लाया जाता था। कुछ महीने पहले ही माधवराव सिंधिया का पार्थिव शव भी कांग्रेस मुख्यालय लाया गया था। लेकिन आज ऐसा नहीं होने वाला था क्योंकि एक महिला राव को नेपथ्य के दौरे पर भेजने में लगी हुई थी।

24, अकबर रोड, कांग्रेस मुख्यालय पर गाड़ी धीमी हुई लेकिन रूकी नहीं। क्योंकि कांग्रेस मुख्यालय का गेट नरसिम्हा राव के लिये जाने कब का बंद कर दिया गया था। नरसिम्हा राव न जाने कितने ही बार इस गेट से अंदर गये होंगे लेकिन आज वो गेट उनके लिये बंद था। मनमोहन सिंह ने बाद में इसके बारे में कहा, मुझे इसकी जानकारी नहीं थी। गेट खुल सकता था लेकिन एक आदेश की देर थी। वो आदेश एक ही व्यक्ति दे सकता था लेकिन उसने तो राव को पूरी तरह से नेपथ्य की यात्रा पर भेजने का सोच लिया था। वो 30 मिनट हर कांग्रेसी के लिये असहज भरे थे।

Related imageवहां से शव को हवाई अड्डे ले जाया गया। जहां से भारतीय वायुसेना एएन-32 विमान से पार्थिव शरीर को हैदराबाद ले जाया गया। शव हैदराबाद पहुंचा और शहर के बीच जुबली हाॅल में लोगों के दर्शन के लिये रखा गया। अगले दिन 1 बजे हुसैन सागर के पास उनका अंतिम संस्कार किया गया। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, नटवर सिंह ही कांग्रेस से अंतिम संस्कार में शामिल होने आये थे। इनके अलावा एचडी देवगौड़ा, आडवाणी भी आये। लेकिन सोनिया गांधी की नाराजगी इतनी बड़ी थी कि वे अंतिम संस्कार में शामिल होने भी नहीं आईं।

उसके बाद वो दृश्य लोगों के सामने आता है। जिसमें एक प्रधानमंत्री का अधजला शव दिखता है। वहां कोई नहीं था सिवाय आवारा कुत्तों के। उनके स्मारक का वायदा न रेड्डी निभा सकें और न ही वफादार मनमोहन सिंह। उनका कार्यकाल जितना विवादित रहा, उतनी ही उनकी मृत्यु भी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here