कोरोना वायरस महामारी से उत्पन्न भयावह स्थिति से निपटने के लिए जिस चीज की सबसे ज्यादा जररूत पड़ती है, वो हैं वेंटिलेटर्स. जिन पर आमतौर पर गंभीर हालत के मरीजों का उपचार किया जाता है. वहीं कोरोना से संक्रमित मरीजों के इलाज में भी वेंटिलेटर्स सबसे अहम भूमिका निभाते हैं. सांस लेने में तकलीफ होने पर वेंटिलेटर का ही सहारा होता है. बता चलें कि आमतौर पर एक वेंटिलेटर की कीमत 5 से 10 लाख के बीच होती है.

प्रतीकात्मक तस्वीर, फ़ोटो सोर्स गूगल

प्रतीकात्मक तस्वीर, फ़ोटो सोर्स गूगल

वेंटिलेटर की कमी से भारत समेत दुनिया के तमाम देश जो कोरोना से प्रभावित हैं, वेंटिलेटर्स की कमी से जूझ रहे हैं. दुनियाभर के देशों की सरकारें वेंटिलेटर्स के इंतजाम में लगी हुई हैं. यूरोप समेत कई देश वेंटिलेटर बनाने वाली कंपनियों को ऑर्डर दे रहे हैं. ब्रिटेन सरकार ने कंपनियों से पूछा है कि क्या वो दो हफ्तों के अंदर 15 से 20 हजार वेंटिलेटर्स बना सकती हैं? वहीं जर्मनी ने 10 हजार और इटली ने 5 हजार वेंटिलेटर्स का ऑर्डर दिया है.

वेंटिलेटर्स की कमी से जूझते दुनियाभर के देश, फ़ोटो सोर्स- गूगल

वेंटिलेटर्स की कमी से जूझते दुनियाभर के देश, फ़ोटो सोर्स- गूगल

अब बात करते हैं भारत की. तो, कोरोना वायरस को लेकर अलर्ट मोड पर आई केंद्र और सभी राज्य सरकारें चिकित्सा सेवाओं में तेजी लाते हुए जगह-जगह अस्पतालों में आइसोलेशन वार्ड बनवा रही हैं. इन तैयारियों के बीच अस्पतालों में भारी संख्या में जरूरी मेडिकल उपकरणों की कमी देखने को मिल रही है.

कोरोना के चलते भारत में स्वास्थ्य उपकरणों की साफ कमी देखी जा सकती है, फ़ोटो सोर्स- गूगल

कोरोना के चलते भारत में स्वास्थ्य उपकरणों की साफ कमी देखी जा सकती है, फ़ोटो सोर्स- गूगल

इनमें सबसे ज्यादा कमी तो वेंटिलेटर्स की पड़ रही है. दरअसल भारत में तकरीबन 40 हजार वेंटिलेटर्स हैं. जो ज्यादातर मेट्रो सिटीज या छोटे शहरों में हैं.

बता दें कि भारत में फिलहाल कोरोना वायरस का संक्रमण दूसरी स्टेज में चल रहा है. विशेषज्ञों के अनुसार अगर ये संक्रमण तीसरी स्टेज यानि कम्यूनिटी ट्रांसफर वाले स्तर पर पहुँचा तो भारत को इतने मरीजों के इलाज के लिए लगभग 50 हजार वेंटिलेटर्स की आवश्यकता होगी.

प्रतीकात्मक तस्वीर, फ़ोटो सोर्स - गूगल

प्रतीकात्मक तस्वीर, फ़ोटो सोर्स – गूगल

ऐसा नही है कि सरकार इस समस्या से निपटने की कोशिश नही कर रही है. हाल में ही केंद्र सरकार ने ढाई हजार नए वेंटिलेटर्स का ऑर्डर दिया है. जिसकी आपूर्ति जल्द से जल्द हो जाएगी. इसके अलावा राज्य सरकारें भी अपनी-अपनी क्षमता के अनुसार वेंटिलेटर्स की आपूर्ति में लगी हुई हैं.

वेंटिलेटर्स की कमी से जूझता भारत, फोटो सोर्स गूगल

वेंटिलेटर्स की कमी से जूझता भारत, फोटो सोर्स गूगल

वेंटिलेटर्स की कमी को दूर करने की इसी मुहिम में जुड़ते हुए महिंद्रा एंड महिंद्रा ग्रुप ने ऐलान किया कि वो 10 लाख के वेंटिलेटर को मात्र 7,500 रुपये में बनाकर बाजार में उतारने वाला है.

महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा, फ़ोटो सोर्स - गूगल

महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा, फ़ोटो सोर्स – गूगल

बीते गुरुवार को कंपनी ने बताया कि उसके पास बैग वॉल्व मास्क वेंटिलेटर के आटोमोटेड वर्जन का प्रोटोटाइप है. कंपनी को उम्मीद है कि 3 दिन के अंदर वो इसका प्रोटोटाइप तैयार कर लेंगे.

फोटो सोर्स गूगल

फ़ोटो सोर्स- गूगल

वहीं महिंद्रा एंड महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने गुरुवार को जानकारी दी कि उनकी टीम 7,500 रुपये से भी कम कीमत में वेंटिलेटर्स तैयार करने पर काम कर रही है. गुरुवार को एक ट्वीट के जरिए इस बारे में जाानकारी देते हुए उन्होंने कहा,

हम एक ICU वें​टिलेटर निर्माता के साथ मिलकर काम कर रहे हैं. यह एक जटिल मशीन है, जिसकी कीमत करीब 5 से 10 लाख रुपये होती है. यह डिवाइस एक अंतरिम लाइफसेवर है और हमारी टीम ने अनुमान लगाया है कि इसकी कीमत 7,500 रुपये से कम होगी.

इसके साथ ही महिंद्रा एंड महिंद्रा के प्रबंध निदेशक पवन गोयनका ने जानकारी देते हुए बताया कि उनकी कंपनी दो बड़ी सरकारी कंपनियों के साथ मिलकर वेंटिलेटर के डिजाइन को सरल बनाने के साथ-साथ उत्पादन बढ़ाने पर बहुत तेजी से काम कर रही है. वहीं दूसरी तरफ हमारी टीम बैग वॉल्व मास्क वेंटिलेटर के आटोमेटेड वर्ज़न पर काम कर रही है. जिसे आमतौर पर अम्बू बैग कहा जाता है.

आंनद महिंद्रा के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

आंनद महिंद्रा के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

हमें उम्मीद है कि हमारी टीम 3 दिनों के अंदर इसका प्रोटोटाइप तैयार कर लेगी. जब यह डिजाइन पूरी तरह तैयार हो जाएगा और मंजूरी मिल जाएगी, तब इसे बनाने के बनाने के लिये मैन्यूफैक्चरर्स को उपलब्ध करा दिया जाएगा.