कल सोशल मीडिया पर भारतीय वायुसेना के जवान विंग कमांडर अभिमन्यु वर्धमान की फ़ोटोज़ और वीडियोज खूब वायरल हुए. अभिमन्यु फिलहाल पाकिस्तान की गिरफ्त में है. पहले इस बात की पुष्टि नहीं हुई थी कि जो जवान पाकिस्तान ने पकड़ा है वो भारत का ही है. लेकिन जैसे-जैसे सोशल मीडिया पर पुरानी तस्वीरें और वीडियो आए तो बात कन्फर्म हो गई. कुछ वेबसाइटों के जरिये भी ये बात पुख्ता हो गई जिन पर इन जवानों की जानकारी रहती है.

जिसके बाद से सारा देश अभिनंदन को वापस लाने की मांग कर रहा है. ट्वीटर पर हैशटैग चल रहा है #getabhinandanback

पाकिस्तान ने एक विडियो रिलीज़ किया जिसमें विंग कमांडर अभिनंदन अपना नाम और सर्विस नंबर बताते हुए दिख रहे हैं। उसके बाद एक और वीडियो आया जिसमे वो बता रहे थे कि पाकिस्तान उनके साथ अच्छा व्यवहार कर रहा है.

अब देश का सबसे बड़ा सवाल ये है कि अभिनंदन को कैसे और कब वापस लाया जाएगा. सबको चिंता है कि अभिनंदन सुरक्षित अपने देश वापस कैसे आएंगे.

ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब भारत का जवान पाकिस्तान के कब्ज़े में हैं. 1999 के कारगिल युद्ध में भी लेफ्टिनेंट नचिकेता पाकिस्तान की गिरफ्त में थे जिन्हे भारत सरकार सुरक्षित वापस ले आई थी. युद्ध के दौरान सभी युद्धबंदियों पर जेनेवा संधि लागू होती है. जिसके तहत उनके साथ सम्मानजनक व्ययवहार किया जाता है. लेफ्टिनेंट नचिकेता भी इसी संधि के तहत वापस ले आए गए थे।

जेनेवा संधि

पहले विश्व युद्ध के बाद अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कई संधियां हुई लेकिन आज जिस संधि का पालन पूरे विश्व में होता है वो है जेनेवा संधि. इसकी नींव 1929 और 1949 के जेनेवा कन्वेन्शन में रखी गई. उन 194 देशों में भारत और पाकिस्तान भी शामिल थे जिन्होंने इस संधि पर हस्ताक्षर किए थे.

युद्ध में जो सैनिक बंदी बना लिए जाते हैं उनके अधिकारों को बनाए रखने के लिए ये कन्वेन्शन हुआ. इस पूरी संधि का लक्ष्य ही ये है कि युद्ध मे बंदी बनाए गए किसी भी सैनिक के साथ व्यवहार करते समय मानवता का ध्यान रखा जाए. इस के लिए कुछ कानून बनाए गए हैं जिनका पालन इस संधि के तहत दुनिया भर में होता है.

इस संधि में साफतौर पर बताया गया है कि युद्ध में जब कोई सैनिक बंदी बना लिया जाए तो उसके क्या अधिकार होते हैं और उससे किस तरह का बर्ताव किया जाना चाहिए.

जेनेवा संधि की मुख्य बातें

  • इस संधि के तहत सैनिकों के साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाना चाहिए. घायल सैनिकों की अच्छी तरह से देख-रेख की जानी चाहिए.
  • उन सैनिकों के साथ किसी भी तरह का अमानवीय व्यवहार और भेदभाव नहीं किया जा सकता है।
    संधि के तहत सैनिक को सभी मूलभूत सुविधाएं देने की बात कही गई है जिसमें खाना-पानी और अन्य ज़रूरते शामिल हैं.
  • सबसे ज़रूरी बात ये कि इस संधि के तहत किसी भी युद्धबंदी को डराया नहीं जा सकता, मारपीट या किसी भी तरह की कोई प्रताड़ना नहीं दी जा सकती.
  • जो सैनिक पकड़ा गया हो उसकी धर्म, जाति या जन्म के बारे में कोई भी सवाल नहीं पूछा जा सकता.
    इस संधि के तहत बंदी सैनिको पर मुकदमा तो चलाया जा सकता है लेकिन युद्ध बंद होने के बाद सैनिको को वापस उसके देश भेज देने का प्रावधान है.
  • इसके अलावा बंदी सैनिको से बस उसका नाम, पद, यूनिट और सर्विस नंबर ही पूछा जा सकता है. इसके सिवाय किसी भी सवाल का जवाब देने के लिए सैनिको को बाध्य नहीं किया जा सकता है.

विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान

इस संधि के तहत पाकिस्तान हमारे जवान अभिनंदन के साथ किसी भी तरह की क्रूरता नहीं कर सकता. पाकिस्तान चाहकर भी हमारे जवान को नुकसान नहीं पहुंचा सकता. ये प्रॉटोकॉल जो इस संधि में दिए गए हैं पाकिस्तान को उनके ही मुताबिक व्यवहार करनी होगा. वरना पाकिस्तान का रवैया पाकिस्तान के लिए ही खतरनाक साबित होगा.

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