मंगलवार को कई औरतों ने सुप्रीम कोर्ट के बाहर धरना प्रदर्शन किया है जिसकी वजह से वहाँ भारी मात्रा में पुलिस बल तैनात किया गया है. महिलाओं ने मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई के इस्तीफ़े की मांग की है. सोमवार को कोर्ट ने रंजन गोगोई को क्लीन चिट दे दिया था जिसके खिलाफ महिला वकीलें और कुछ एनजीओ में काम करने वाली महिलाओं ने प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारी महिलाएं प्लेकार्ड लेकर प्रदर्शन कर रहीं थीं जिसमें लिखा था:

‘ NO MEANS NO’, ‘FOLLOW DUE PROCESS’, ‘BE HOUSEOVER HIGH YOUR ARE LAW IS ABOVE YOU’ ‘SUPEREMACY OF LAW MUST BE MAINTAINED’, ‘INVESTIGATE THE MATTER AFRESH’

प्रदर्शन करती महिलाएं/फोटो सोर्स गूगल

वहाँ मौजूद महिलाएं जज को क्लीन चिट दिए जाने के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए कह रही थी कि न्याय खतरे में है. फिलहाल पुलिस ने किसी भी ग्रुप के सुप्रीम कोर्ट के बाहर इकट्ठा होने पर प्रतिबंध लगा दिया है. कुछ महिलाएं जो प्रदर्शन कर रहीं थी उन्हें गिरफ्तार भी किया गया है. पहले बताया जा रहा था कि प्रोटेस्ट की वजह से धारा 144 लगाई गयी है पर दिल्ली के डीसीपी मधुर वर्मा ने बताया-

“सुप्रीम कोर्ट के सामने का एरिया हाइ सेक्युर्टी वाला एरिया है जहां हर वक़्त धारा 144 लागू रहती है. हर 60 दिन में हम इसका नवीनीकरण करते हैं और हाल ही में अप्रैल में इसका नवीनीकरण किया गया था. किसी भी तरह का प्रदर्शन सुप्रीम कोर्ट के आस-पास करने की अनुमति नहीं है. इन सब प्रदर्शन के लिए जंतर-मंतर जैसी जगहें बनी हुई हैं, जहां प्रदर्शन करने पर कोई रोक नहीं है.”

एनी रजा जो एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं, उन्होंने कहा-

“औरतें हमेशा से संघर्ष करती आ रही हैं. सुप्रीम कोर्ट के कमिटी ने सभी नियमों को ताक पर रख दिया है. हमें एक पारदर्शित कार्यवाही चाहिए. हम अपनी न्याय व्यवस्था को बचाना चाहते हैं. अगर सुप्रीम कोर्ट ही नियमों का उलंघन कर रहा है तो फिर किसी को भी न्याय पर भरोसा नहीं होगा.” 

कस्टडी में ली गईं महिलाओं को कल शाम 3 बजे छोड़ दिया गया. रंजन गोगोई को क्लीन चिट देने वाले जजों की बेंच जिसमें बोबदे, इन्दु मल्होत्रा और इन्दिरा बैनर्जी शामिल हैं. उनके खिलाफ भी लोगों में काफी आक्रोश है. आपको बता दें कि रंजन गोगोई को सबूतों के आभाव की वजह से क्लीन चिट दिया गया है.

प्रदर्शन करती महिलाएं/ फोटो सोर्स गूगल

दूसरी ओर आरोपी महिला ने भी अपना हाथ इस पूछताछ से पीछे खींच लिया है. उनका कहना है कि उन्हें किसी तरह के न्याय की कोई उम्मीद नहीं है. उन्होंने एक लेटर लिखा है जिसमें उन्होंने बताया है कि वह कमिटी से काफी डरी हुई हैं. उन्हें उनके वकील से भी बात नहीं करने दिया जा रहा था जिससे वह काफी घबराहट भी महसूस कर रही थी.

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