सियासत को पुरूषों की जागीर समझा गया है। कहा जाता रहा है कि महिलायें सियासत और सत्ता की जिम्मेदारी को नहीं संभाल पाती हैं। लेकिन ये सिर्फ एक धारणा है। महिलाएं घर को भी अच्छे से संभाल सकती हैं और देश को भी। इस बात का सबूत हमारे देश की सत्ता का इतिहास देता है। एक महिला ने देश को कई साल तक अकेले चलाया लेकिन इसके बावजूद भी सत्ता में महिलाओं की भागीदारी ज्यादा बढ़ी नहीं है। राजनैतिक पार्टियों ने भी उनको कम मौका दिया है। ज्यादातर वो महिलाएं राजनीति में हैं जिनका पहले से राजनीति में कुछ न कुछ ताल्लुक रहा है। ऐसी महिलाओं को राजनीति विरासत में मिली है। ऐसे कम ही उदाहरण हैं जिनमें महिलायें अपनी खुशी से राजनीति में आई हों।

Image result for priyanka gandhiमहिलाओं की राजनीति में भागीदारी, सत्ता में उनकी कितनी भूमिका है, इस बारे में एक सर्वे हुआ है। ये सर्वे एडीआर और नेशनल इलेक्शन वाॅच ने मिलकर किया है। इसमें सत्ता के गलियारे में महिलओं की भागीदारी कितनी है इस रिपोर्ट से सब पता चला जायेगा। एडीआर ने इस रिपोर्ट को 8 मार्च को प्रेस रिलीज करके जारी किया है। इसमें साल 2004 से 2014 में महिलाओं की भारतीय राजनीति में उनकी भागीदारी के बारे में बताया गया है।

राजनीति और महिलायें

पूरे देश में राजनीति के गलियारे में 51,143 कैंडिडेट सत्ता में हैं। जिसमें महिलायें सिर्फ 4,173 हैं यानि कि सिर्फ 8 फीसदी। 92 फीसदी पदों पर पुरूष ही हैं। इन 4,173 महिलाओं में से 546 कैंडिडेट के उपर अपराधिक मामलों के केस दर्ज है। 4,173 कैंडिडेट में 1060 महिलाओं की संपति करोड़ों में है। 2004 से 2014 तक तीन बार लोकसभा के चुनाव हो चुके हैं लेकिन महिलाओं की बढ़ोतरी नाममात्र की हुई है।

percentage of women candidate2004 के लोकसभा चुनाव में 5,435 कैंडिडेट्स ने चुनाव लड़ा जिसमें महिलाएं सिर्फ 355 थीं। 2009 के लोकसभा चुनाव में कैंडिडेट्स की संख्या बढ़कर 8070 हो गई लेकिन महिलाओं की भागीदार 556 थी। ये बढ़ोतरी सिर्फ नाममात्र की थी। 2014 के लोकसभा चुनाव में कैंडिडेट्स बढ़कर 8,251 हो गये, जिनमें महिलायें 668 थीं। ये तो लोकसभा चुनावों की बात है। विधानसभा चुनाव में तो ये हालत और बदतर है। कुछ ही राज्य हैं जहां चुनाव में 10 परसेंट कैंडिडेट महिलायें होती हैं। झारखंड, पश्चिम बंगाल, सिक्किम और छत्तीसगढ में महिलायें राजनीति में सबसे ज्यादा सक्रिय हैं।

सत्ता के गलियारे में

इस रिपोर्ट में चुनाव में उतरने वाले कैंडिडेट्स के बारे में भी जानकारी है और सत्ता के गलियारे में महिलाओं के बारे में भी डेटा दिया हुआ है। इस समय पूरे देश में 770 सांसद हैं और 4095 विधायक हैं। दोनों का टोटल करें तो होते हैं 4,865। जिसमें से महिलाओं की संख्या सिर्फ 440 है यानि कि 9 फीसदी।

womens siiting in parliament440 सत्ताधारी महिलाओं में से 94 महिलाओं पर क्रिमिनल केस रजिस्टर्ड हैं। 310 महिलाएं करोड़पति हैं। लोकसभा में 542 सांसदों में सिर्फ 66 महिलाएं सांसद हैं और राज्यसभा में 228 एमपी में 25 महिलायें हैं। किस पार्टी की महिलायें सबसे ज्यादा सत्ता में हैं तो वो बीजेपी है। बीजेपी के 150 एमपी-एमलए हैं, इसके बाद कांग्रेस है जिनकी पार्टी की 91 महिलाएं सांसद-विधायक के पद पर हैं। जिस राज्य से सबसे ज्यादा महिलायें विधायक हैं उनमें छत्तीसगढ़, झारखंड और पश्चिम बंगाल है। मिजोरम-नागालैंड में कोई भी महिला सत्ता के पद पर नहीं है।

ये डेटा भयानक इसलिए है क्योंकि हम एक पुरुषप्रधान देश में रहते हैं। जहां महिलाओं के पहनावे-ओढ़ावे से लेकर उसे क्या सोचना है तक पर पुरुषों का प्रभाव रहता है। ऐसे में किसी भी समाज या अंग को बदलने के लिए सही फैसला वही इंसान ले सकता है जो उस समाज से जुड़ा हो, जो उस समाज की दिक्कतों को समझे।

एक पुरुष चाहे कितने भी नियम कानून महिलाओं के हक़ के लिए बना ले लेकिन कहीं न कहीं उन फैसलों में कुछ कमी या फिर एक पुरुषवादी सोच की झलक रह जाती है। इसलिए यह काफी जरूरी है कि यह आंकड़ा बदले। महिलाओं को महिलाओं के उत्थान के लिए आगे आना होगा और राजनीति में अपने पाँव जमाने होंगे क्योंकि जबतक ऐसा नहीं होगा महिलाओं से जुड़ी समस्याएँ हमारे देश में बरकरार रहेंगी।

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