कभी सोशल मीडिया पर आक्रोश से भरे पोस्ट, तो कभी सड़कों पर मोमबत्ती जला कर जुलूस निकालना। इंडिया गेट और जंतर-मंतर जैसी जगहों पर मीडिया के सामने इंसाफ मांगना। सालों से महिला सुरक्षा पर काम करने की बात करने वाले नेताओं के भाषण और फिर बलात्कार की बढ़ती हुई घटनाओं पर हम सबका व्यक्तिगत रूप से गुस्सा ज़ाहिर करना।
जब-जब हमारे देश में औरतों के साथ ऐसी किसी भी तरह की घटना की खबर आती है तो सारा देश एकजुट होकर ऐसी घटना की खिलाफ खड़ा हो जाता है और पीड़िता का साथ देता है।

होना भी चाहिए!

नवीन जयहिंद, फोटो सोर्स: गूगल

हर बड़ा-छोटा नेता, हर राजनीतिक पार्टी और प्रशासन में बैठे सभी लोग ऐसे मामलों की निंदा करते हैं। पर फिर ऐसा क्यों है कि आज भी लगातार, बलात्कार जैसी घिनौनी घटनाएँ हमारे देश को दीमक की तरह चाटती जा रही हैं। क्यों इतनी कानून व्यवस्थाओं के बावजूद, इतने आंदोलनों के बाद भी बलात्कारियों की सोच में कोई बदलाव नहीं आ रहा है।

दिल्ली में 16 दिसम्बर, 2012 को हुई एक दिल दहलाने वाली हिंसात्मक घटना, निर्भया कांड। जिसमें एक लड़की का बलात्कार करके उसे अधमरी हालत में सड़क पर फेंक दिया गया था। उसके बाद मानो सारे देश का गुस्सा एकसाथ उमड़ आया था। तमाम लोग उसे इंसाफ दिलाने के लिए सड़कों पर उतर आए थे।

आज तक उस घटना को भुलाना मुमकिन नहीं हो पाया है। भूलना चाहिए भी नहीं। लेकिन ऐसा क्या हुआ है कि हम अपने देश के कुछ लोगों के ज़ेहन में इस बात का एहसास नहीं करा पा रहे हैं कि हम चाहे कितनी तरक्की क्यों न कर लें, लेकिन जब तक देश में बलात्कार और यौन शोषण जैसे घिनौने कारनामों को अंजाम देने वाले लोग हमारे समाज का हिस्सा हैं, हमारी तरक्की किसी काम की नहीं है।

हाल ही में हमारे सुंदर और समझदार समाज में नीचता की हदें पार करती हुई एक और घटना सामने आई। जहां अलीगढ़ में 3 साल की एक बच्ची की लाश कूड़ेदान में मिली। उस हादसे को लेकर कई अफवाहें भी सुनने को मिली थी जिसमें बच्ची के साथ बलात्कार होने और उसकी उस पर तेज़ाब डाल कर जलाने जैसी बातें हो रही थीं। हालांकि बाद में जांच में इन सारी बातों को गलत पाया गया।

लेकिन जो भी हो ऐसे खौफनाक हादसे को अंजाम देने वाले आरोपी को सज़ा मिलने से भी ज़्यादा ज़रूरी है कि ऐसी हिंसात्मक सोच पैदा करने वाली विचारधारा को जड़ से मिटाया जाये।

इसके लिए हमारी सरकारों और हम सब लोगों को प्रयास करना होगा। प्रयास जो वाकई में ऐसी मानसिक स्थिति पैदा करने वाले तत्वों को खत्म कर सकें। लेकिन हम सिर्फ भाषण देने और जुलूस निकालने में लगे रहते हैं। देश में इस तरह की घटनाओं के लगातार घटने नेता अफसोस तो जाता रहे हैं लेकिन क्या उनके इस तरीके के अफसोस से कुछ बदल जाएगा?

ये सारी भूमिका बांधी गई आपको ये खबर बताने के लिए –

ऐसे ही एक नेता है आम आदमी पार्टी के हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष नवीन जयहिंद। ये नेता जी भरी गर्मी में, खुले आसमान के नीचे तप करने बैठ गए हैं। आम आदमी पार्टी हरियाणा ने इनकी फोटो ट्वीट भी कर दी। नवीन जयहिंद इन घटनाओं को देख कर इतने दुःखी हो गए कि धूप में तप करने बैठ गए।

सर अगर तप करने से जुर्म को रोका जा सकता तो भारत में जुर्म होते ही नहीं। यहाँ तो बड़े-बड़े तपस्वी जन्में हैं।
नवीन की जो तस्वीर ट्वीट की गई है उसे देख कर उनकी ही पार्टी के एक नेता आलोक अग्रवाल ने उनकी आलोचना करदी। आलोक ‘आप’ के मध्यप्रदेश संयोजक हैं। इन्होंने नवीन की फोटो को रिट्वीट करते हुए उनकी इस हरकत को नौटंकी बताया।

अब इस पर नवीन की पत्नी और दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालिवाल ने जवाब में आलोक को कहा कि –

“वो एक बेशर्म नेता हैं और उनके जैसे नेताओं की वजह से ही देश की ऐसी हालत है।”

अब ट्वीटर पर इतनी बहस करने पर और फिर एक बार एक गंभीर समस्या को सियासी रूप देने के लिए हमें सबसे पहले नवीन जयहिंद से यही कहना चाहिए कि उनकी भावनाएं भले ही गलत न हों लेकिन ये भी एक सच है कि इस तरह धूप में तप करने से तो देश के हालात नहीं ही ठीक होंगे। इसके लिए सबको मिलकर ज़मीनी स्तर पर काम करना होगा।

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