वाह रे राजनीति! ना जाने तेरे कितने रुप देखने को मिलेंगे। राजनीति में कुर्सी की चाह में नेता इतने अंधे हो जाएंगे यह बात सोचने में भी शर्म आती है। हरियाणा में जो राजनीति चल रही है ऐसा लग रहा है कि खट्टर सरकार को एक आम जनता और बलात्कारी मुजरिम के बीच अंतर समझने की सोच खत्म हो गई है। बलात्कार के दो मामलों में 20 साल की सजा काट रहा गुरमीत राम रहीम जेल से बाहर आने के लिए बेताब हुआ तो हरियाणा सरकार जैसे उसके खुशामद में लग गई। हरियाणा सरकार पूरी तरह से यह भूल गई कि जिस इंसान के लिए वह बाहर निकालने की सिफारिश कर रहे हैं उस पर बलात्कार का केस चल रहा है।

राम रहीम ने मांगी है 42 दिनों की पैरोल

रोहतक की सुनारिया जेल में बंद डेरा सच्चा सौदा प्रमुख राम रहीम ने पैरौल पर जेल से बाहर आने की मांग की है। नियमों के मुताबिक अगर कोई आरोपी जेल में दो साल से ज्यादा की सजा जेल में काट लेता है तो उसके बाद उसे पैरोल पर बाहर आने की अनुमति है।

राम रहीम, फोटो सोर्स: गूगल
राम रहीम, फोटो सोर्स: गूगल

रहीम ने कहा कि वह अपने जिले में खेती करना चाहता है। जिस खेत पर राम रहीम खेती करना चाहता है उसको लेकर सिरसा के तहसीलदार का एक रिपोर्ट आया है। रिपोर्ट के मुताबिक डेरे के पास कुल 250 एकड़ जमीन है। इसमें कहीं भी राम रहीम मालिक या कश्तकार नहीं है। इसलिए जमीन पर खेती करने के लिए पैरोल पर रिहा करने की अपील बिल्कुल बे-बुनियाद है।

क्या होता है पैरोल?

कानून की किताबों में जिस तरह से पैरोल के बारे में ज़िक्र किया गया है उसके मुताबिक पैरोल दो तरह के होते हैं। पहला कस्टडी पैरोल और दूसरा रेग्यूलर पैरोल। कस्टडी पैरोल किसी कैदी को उस वक्त दी जाती है जब कैदी के घर किसी की मौत हो जाती है या फिर किसी की शादी होती है या कोई बीमार हो। कस्टडी पैरोल के लिए कैदी जेल अधीक्षक को आवेदन करता है। अगर जेल प्रशासन आवेदन खारिज कर दे तो कोर्ट में अपील की जा सकती है। कस्टडी पैरोल के दौरान आरोपी या दोषी को पुलिस अभिरक्षा में जेल से बाहर लाया जाता है। इसकी अधिकतम अवधि 6 घंटे होती है।

प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स: गूगल
प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स: गूगल

रेगुलर पैरोल दोषी कैदी को ही दी जाती है। इसमें समय सीमा भी निर्धारित होती है। यह उस दोषी के लिए लागू नहीं होता है जो रेप के बाद हत्या की घटना को अंजाम दिया हो। पैरोल के लिए दोषी को भारत का नागरिक होना ज़रुरी है। आतंकवाद और देशद्रोह मामले में पैरोल नहीं दिया जाता है। रेगुलर पैरोल एक बार में एक माह के लिए दी जाती है। विशेष स्थिति में इसे बढ़ाया जा सकता है।

दोनों पैरोल को देखा जाए तो राम रहीम को अगर पैरोल दिया जाता है तो वह रेगुलर पैरोल होगा। अब इसके लिए जेल में राम रहीम के कंडक्ट को भी देखना होगा कि कैसा रहा है?

सरकार क्यों आ रही है सामने?

राम रहीम ने जैसे ही पैरोल पर बाहर आने के लिए अपील की है तब से राजनीति गलियारों में काफी हलचल है। सबसे ख़ास बात है कि हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर, जेल मंत्री कृष्ण पवार और स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने इसके लिए ख़ास पैरवी की है। अनिल विज ने तो यहां तक कह दिया है कि राम रहीम एक आम इंसान के हकदार के चलते पैरोल का हकदार है। अब जरा सोचिए ये सत्ता में बैठे ऐसे लोगों का बयान है जिनको एक बलात्कारी जिसका जुर्म प्रमाणित हो गया है और आम जनता में कोई अंतर नहीं समझ आ रहा है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर सरकार इसके पीछे इतनी बेचैन क्यों है?

मनोहर लाल खट्टर, फोटो सोर्स: गूगल
मनोहर लाल खट्टर, फोटो सोर्स: गूगल

दरअसल, इसी साल अक्टूबर में हरियाणा में विधानसभा का चुनाव होने वाला है। गुरमीत राम रहीम का मुख्यालय सिरसा में है। हरियाणा में इसके अनुयायियों की संख्या लाखों में है। जिसका सीधा फायदा सरकार को होगा। राम रहीम लौट कर डेरे पर अपने समर्थक जमा कर सकता है तो वही सरकार का भी वोट बैंकिंग मजबूत हो सकता है। अगर सरकार इस बारे में इतना सोच रही है तो विपक्ष कहाँ इसमें पीछे रहने वाला है। स्वराज इंडिया के नेता योगेन्द्र यादव ट्वीट पर तंज कसा है। योगेन्द्र यादव ने ट्वीट करते हुए लिखा-

हत्यारा और बलात्कारी ‘बाबा’ चुनाव की खेती करेगा! और खट्टर जी वोटों की फसल काटेंगे! अगर हरियाणा सरकार गुरमीत सिंह को खेती करने के बहाने जेल से छुट्टी देती है तो स्वराज इंडिया इसे कोर्ट और सड़क दोनों जगह चुनौती देगी।

कस्टडी पैरोल के लिए कैदी जेल अधीक्षक को आवेदन करता है। अगर जेल प्रशासन आवेदन खारिज कर दे तो कोर्ट में अपील की जा सकती है। कस्टडी पैरोल के दौरान आरोपी या दोषी को पुलिस अभिरक्षा में जेल से बाहर लाया जाता है। इसकी अधिकतम अवधि 6 घंटे होती है।

अब राम रहीम को जेल से पैरोल पर बेल मिलेगी या नहीं ये तो नहीं पता, लेकिन खट्टर सरकार की नज़रें जरुर इस बारे में क्या फैसला आता है इस पर रहेगी। आखिर, कुर्सी का जो सवाल है। वैसे भी सीएम मनोहर लाल खट्टर भी कह चुके हैं कि पैरोल पर बेल पाना हर किसी का हक़ है। राम रहीम फिलहाल दो बलात्कार और एक पत्रकार की हत्या के जुर्म में जेल में बंद है। पहले अगस्त 2017 में दो महिलाओं के साथ दुष्कर्म करने के आरोप में 20 साल की सज़ा सुनाई गई थी। फिर इसी साल जनवरी में एक पत्रकार की हत्या में 16 साल की सज़ा सुनाई गई।

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