चुनाव आयोग का काम इस लोकसभा चुनाव में जितना मुश्किल होता दिख रहा है, इसके पहले शायद ही कभी ऐसा हुआ होगा। लोकसभा चुनाव का प्रचार अभियान जबसे शुरु हुआ है तब से लेकर अभी तक चुनाव आयोग ने लगभग वे सभी नेता जो अपने विवादित भाषण के लिए जाने जाते हैं, को नोटिस जारी कर चुका है। इनमें केन्द्रिय मंत्री मेनका गांधी, योगी आदित्यनाथ, मयावती के साथ साथ आजम खान भी शामिल हैं। आजम खान को जहां उनके बेहूदा बयान के लिए दो बार नोटिस भेजा जा चुका है तो वहीं योगी आदित्यनाथ को भी दूसरी बार चुनाव आयोग ने नोटिस जारी किया है।

योगी आदित्यनाथ इस लोकसभा चुनाव में केवल उत्तर प्रदेश में ही नहीं बल्कि पूरे भारत में चुनावी रैलियां कर रहे हैं।। इस बीच उनकी जुबान कई मौकों पर फिसलती हुई नजर आई है। पहली बार योगी आदित्यनाथ को उनके बजरंग बली वाले बयान पर चुनाव आयोग ने नोटिस जारी किया था। जिसके बाद उनपर 72 घंटो का बैन लगा दिया गया था। लेकिन अपने विवादित बयानो से हमेशा सुर्खियों में रहने वाले योगी आदित्यनाथ एक बार फिर से विवदित बयान देकर चुनाव आयोग के नज़र में आ गए हैं।

दरअसल, संभल में एक जनसभा को संबोधित करते हुए सपा-बसपा उम्मीदवार को योगी आदित्यनाथ ने बाबर की औलाद कहा था जिसके बाद बवाल शुरु हो गया। इस बयान के बाद चुनाव आयोग ने नोटिस जारी कर इस बारे में जवाब मांगा। चुनाव आयोग के नोटिस जारी करने के बाद योगी आदित्यनाथ ने प्रतिक्रिया दे दी है। योगी ने कहा,

‘आपसी बातचीत को कहीं कहना आचार संहिता में नहीं आता। कोई मंच पर भजन करने के लिए नहीं जाता है। कोई भी अपने विरोधियों को उखाड़ फेकने के लिए मंच पर जाता है।’

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हमारा काम विरोधियों की कमजोरियों को उजागर करना है। उसे जनता के सामने रखना हमारा कर्तव्य है। अगर चुनाव के दौरान सपा-बसपा और कांग्रेस हमें गाली देती है तो हम बुरा नहीं मानेंगे। योगी के इस प्रतिक्रिया के बाद अभी तक हालांकि चुनाव आयोग का स्पष्टिकरण नहीं आया है। लेकिन योगी जी जिस तरह से कह रहे हैं कि आपसी बातचीत को कहना आचार संहिता में नहीं आता लेकिन तब ही तक जब तक वह बात आपस में ही रहे। किसी स्टेज पर चढ़ कर आपसी बातचीत करते तो हमने किसी को नहीं देखा। जब आप किसी बात को जनसभा में कहते है जिससे कुछ लोगों का समुदाय प्रभावित होता है तो कहीं न कहीं यह नियम के खिलाफ है। यहाँ धार्मिक तुष्टीकरण के सहारे चुनावी गेम खेला जा रहा है।