अकबर इलाहाबादी ने कभी कहा था, “खींचो न कमानों को न तलवार निकालो, जब तोप मुक़ाबिल हो तो अख़बार निकालो।” इस पंक्ति से पत्रकारिता पेशे की ताकत का अंदाज़ा लगाया जा सकता है। लेकिन आज के समय में इलाहाबादी की लिखी इस पंक्ति से पत्रकारिता पेशे की ताकत का सिर्फ अंदाजा ही लगाया जा सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस पेशे की हकीक़त कुछ और ही है।

कुछ और ही कहने का मतलब ये है कि जिस तरह किसी गधे के गले में टाई बांध देने के बाद भी गधा जेंटल मैन नहीं बन सकता है। ठीक उसी तरह प्रेस कार्ड गले में लटका लेने भर से कोई पत्रकार नहीं बन जाता है। आज के समय में पत्रकारिता के नाम पर जो घोर-मट्ठा देश भर में किया जा रहा है, उसी का परिणाम है कि अब पत्रकारिता के पेशे पर से लोगों का भरोसा खत्म होने लगा है।

इंटरनेट पर सही ख़बरों से ज्यादा अधपका ज्ञान और प्रोपेगेंडा जैसी खबरें पढ़ने और देखने को मिल रही हैं। राजनीतिक दल के नेताओं ने अपने फायदे के लिए अकबर इलाहाबादी की इस पंक्ति के स्वरूप को थोड़ा बदल दिया है। मेरे कहने का मतलब ये है कि अब तोप वाली खबरों को दबाने के लिए प्रोपेगेंडा वाली खबरों को मीडिया की मदद से फैलाया जाना लगा है।

बरसात के मौसम में और चुनावी मौसम में कीचड़ होना आम बात है। अभी बरसाती नहीं चुनावी मौसम है ऐसे में खबरों को कीचड़ बनाकर प्रस्तुत किया जा रहा है। चुनावों के इस माहौल में टीवी में आपको बहुत कुछ देखने को मिलेगा और विशेष प्रकार के पत्रकारों द्वारा बहुत कुछ दिखाया भी जाएगा।

यह सब कुछ यथार्थ और सपनों के बीच का होगा। आपको तरह-तरह की तस्वीरों और वीडियो के जरिये बरगलाया जाएगा और किसी खास राजनीतिक दल के पक्ष में आपके विचारों को झुकाने के लिए मज़बूर किया जाएगा। इसी क्रम में भारतीय मीडिया की एक ओछी हरकत हमारे हाथ लगी। बात पूरी करने से पहले आप इस वीडियो को देखिये-

ज़ी मीडिया ग्रुप ऐसे भी ज्यादातर खबरों को बगैर किसी लाग-लपेट के निष्पक्ष तरह से भाजपा के पक्ष में ही रखती है।  ऐसे में एक बार फिर से अपनी निष्पक्षता के हवाले से ज़ी न्यूज़ ने एक ख़बर चलाई जो आपने ऊपर की वीडियो में देखा।

दरअसल, इस वीडियो की सच्चाई वो नहीं है जो आपको ज़ी के एंकर द्बारा चिल्ला-चिल्ला कर बताई गई है। जिस ख़बर को अभी आपने ज़ी मीडिया की चौचक स्क्रीन पर एंकर द्वारा चिल्लाकर बोलते देखा उस ख़बर की हकीकत यह है कि कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने व्यंगात्मक शैली में मसूद अज़हर को अज़हर जी कहा है। इस कार्यक्रम में राहुल गांधी भाजपा पर कटाक्ष करते हुए कह रहे थे कि भाजपा की सरकार ने मसूद अजहर ‘जी’ को पाकिस्तान में जाकर छोड़ा। यही अजीत डोभाल जी थे जो मसूद अज़हर को छोड़ने पाकिस्तान गए थे।

इस व्यंगात्मक राजनीतिक हमले को मीडिया ने भाजपा के पक्ष में करने का पूरा प्रयास किया। इस काम में मीडिया ने भाजपा आईटी सेल की तरह काम किया और उन्हें काफी हद तक सफलता भी मिली।

यह पहली बार नहीं हुआ है जब ज़ी मीडिया द्वारा किसी खबरों को तोड़-मरोड़ कर लोगों के बीच फैलाया गया हो। इससे पहले भी जेएनयू मामले में हमने देखा कि ज़ी मीडिया ने देश भर में जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी और वहां पढ़ने वाले छात्रों की इमेज को देशद्रोही के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया था। सरकार ने जेएनयू मामले में जिन वीडियो को जांच के लिए फॉरेंसिक लैब में भेजा था, जांच के बाद यह पाया गया कि उनमें से कई वीडियो एडिटेड थे।

ज़ी न्यूज़ के एक कर्मचारी ने स्टूडियो के अंदर जेएनयू के वीडियो से हो रही छेड़-छाड़ का हवाला देकर नौकरी छोड़ी थी. सोर्स – HT News वेबसाइट का स्क्रीनशॉट

जब जेएनयू मामले में ज़ी के स्टूडियो में वीडियो के साथ छेड़-छाड़ किया जा रहा था तब वहां काम करने वाले एक कर्मचारी ने इसका विरोध किया इसके बाद उन्होंने नौकरी छोड़ दी। नौकरी छोड़ने वाले ज़ी के कर्मचारी ने अंदर हो रहे प्रोपेगेंडा के बारे में जो कुछ भी कहा उसे कई मीडिया संस्थानों ने अपने वेबसाइट पर छापा था। हिंदुस्तान टाइम्स के आर्टिकल का स्क्रीनशॉट आप ऊपर पढ़ सके हैं।

ऐसे में जब ख़बर को गलत तरह से सोशल मीडिया के जरिये देश में फैलाया जा रहा हो तो हमें सजग व सतर्क रह कर इन सबको समझना चाहिए।

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