कर्म ही धर्म है

ये हम नहीं कह रहे हैं. पाक ग्रंथ गीता में ये लिखी हुई बात है. इसका अर्थ यह है कि आप जो काम करते हैं वही आपका धर्म है.

फिर ऐसा क्या हो गया कि लोग धार्मिक नहीं हो पा रहे हैं? मतलब कि वह अपना काम नहीं कर पा रहे हैं.

क्या हुआ है?

ये लोग कोई और नहीं ज़ोमैटो के डिलीवरी बॉयज़ हैं. मामला यह है कि कोलकाता में रविवार को ज़ोमैटो के डिलीवरी वाले लड़कों ने धरना दिया था और कुछ लड़के शायद आज भी धरने पर बैठे होंगे. शायद इसलिए क्योंकि हमारे सूत्र से अभी कुछ पक्की जानकारी प्राप्त नहीं हुई है.

धरने पर बैठे जोमैटो के कर्मचारियों का इल्ज़ाम है कि ज़ोमैटो वाले उनके साथ ज़बरदस्ती कर रहे हैं. उनका कहना है कि कंपनी वाले उन्हें फ़ोर्स कर रहे हैं बीफ और पॉर्क (सूअर का मांस) डिलीवर करने के लिए. बीफ का मतलब हमने इसलिए नहीं समझाया क्योंकि इसके वजह से इतने लोगों की जान गयी है कि लोग अब डिटेल में इस विषय को समझ चुके हैं. लोग अब बीफ सुनते ही कुल्हाड़ी, डंडा जैसे पारंपरिक हथियारों से लैस हो जाते हैं. खाना डिलीवरी करने वालों का कहना है कि ऐसी चीज़ें डिलीवर करने से उनके धार्मिक सेंटिमेंट को पीड़ा पहुँचती है.

देखिये ऐसा है कि आपकी सेंटिमेंट की हम कद्र करते हैं पर, जिस धर्म का आप वास्ता दे रहे हैं उसी धर्म ने कर्म को धर्म बताया है और डिलीवरी करने का कर्म आपने खुद ही चुना है. दूसरी बात यह है कि अगर आप हिन्दू हैं तो, पहली बात तो हिन्दू धर्म में कहीं बीफ खाने से मनाही नहीं है. लोगों की अपनी-अपनी मान्यता होती है जो पूरे तरीके से सही है. गाय को हम माता मानते हैं इसलिए उसे काटना और खाना बुरी बात हो सकती है लेकिन, यहाँ आपको सिर्फ खाना पहुंचाना है.

अगर आप मुसलमान हैं तो आपको सूअर से ऐतराज़ उसको खाने में होना चाहिए क्योंकि कुरान में इसे हराम बताया गया है. इसे किसी और के घर डिलीवरी करने में आपको मसला नहीं होना चाहिए. ज़ोमैटो वाले बेचारे इस बार थोड़े कमज़ोर पड़ गए हैं. यह मामला सोल्व हो जाए इसकी कोशिश में वह लगे हैं. धरना पर बैठे एक डिलीवरी एजेंट का कहना है-

कंपनी हमारी धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ कर रही है. कंपनी हमें धमका भी रही है. कंपनी ने हमें किसी भी तरह का आर्डर डिलीवर करने के लिए कहा है. हम हिन्दू हैं लेकिन, फिर भी हमें बीफ डिलीवर करने के लिए कहा जा रहा है. कुछ दिनों में ऐसा भी हो सकता है कि हमारे मुस्लिम भाइयों को पॉर्क डिलीवर करने के लिए बोला जा सकता है. यह हमें स्वीकार नहीं है.

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प्रदर्शन करते ज़ोमैटो के डिलीवर एजेंट/फोटो सोर्स गूगल

इसका जवाब ज़ोमैटो ने अच्छा दिया. ज़ोमैटो ने कहा-

डिलीवरी पार्टनर को काम समझना पड़ेगा क्योंकि उन्होंने खुद से इस जॉब को चुना है.

इन डिलीवरी बॉयज़ को यह समझने की जरूरत है कि काम के मामले में धर्म और जाति नहीं देखी जाती। इस तरह की हरकतें सिर्फ और सिर्फ धार्मिक कट्टरता को ही बढ़ावा देते हैं. ऐसे में देखा जाये तो, जब धार्मिक भावनाएं आहत होने की बात हो ही रही है तब, वह इंसान कहाँ गलत था जिसने सावन में मुसलमान से खाना लेने से मना कर दिया था क्योंकि डिलीवरी वाला मुसलमान था. उसकी भी अपनी ‘पर्सनल’ धार्मिक भावनाएं थी और अगर डिलीवरी करने वालों की मांगें जायज़ है तो, ऐसे में उस व्यक्ति की भी मांग जायज़ थी. उस वक़्त सभी ने इस बुनियाद पर उसे गलत ठहराया था क्योंकि उसने बेतुकी मांग की थी. ठीक उसी तरह इस मांग में भी कोई तुक नहीं है. हम किसी को सपोर्ट नहीं कर रहे हैं पर, नेताओं ने हिन्दू-मुस्लिम इतना कर दिया है कि अब तो जानवर भी हिन्दू और मुस्लिम की कैटेगरी में आने लगे हैं और यह बेहद अफसोस की बात है.          

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